पश्चिम बंगाल के हावड़ा में कथित गैंगस्टर आकाश सिंह को पुलिस द्वारा विभिन्न अपराध स्थलों पर ले जाकर कराए गए क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। आरोपी को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बनियान और चड्डे में शहर के अलग-अलग इलाकों में ले जाया गया। इस वाकिए की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर बहस छिड़ चुकी हिअ।
ज्ञात हो की, गैंगस्टर आकाश सिंह को हावड़ा के आपराधिक नेटवर्क का एक कुख्यात चेहरा माना जाता है। पुलिस रविवार (24 मई) को उसे पुराने मामलों की जांच के तहत कई कथित अपराध स्थलों पर लेकर गई। इस दौरान आरोपी को बनियान और चड्डे में सार्वजनिक रूप से घुमाए जाने को लेकर विपक्षी पार्टियों की ओर से आलोचना शुरू हो गई।
हाल ही में पश्चिम बंगाल में एक अन्य आरोपी को भी कथित तौर पर अंडरगारमेंट्स में सार्वजनिक रूप से घुमाने का मामला चर्चा में रहा था। अब इस नई घटना के बाद राज्य में पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों के साथ व्यवहार को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
So called don of Howrah, Akash Singh, was paraded in his underwear on the streets of Howrah.
He is accused of shooting policemen in 2021 and hurling more than 20 bombs.
Police had arrested him earlier this month, but paraded him today to send a strong message to all goons. pic.twitter.com/oZGEsmwWla
— Facts (@BefittingFacts) May 24, 2026
पुलिस के अनुसार मालीपांचघड़ा और गोलाबाड़ी पुलिस थानों की टीमों ने संयुक्त रूप से यह रीकंस्ट्रक्शन ऑपरेशन चलाया। जांच एजेंसियां पुराने मामलों की कड़ियों को दोबारा खंगाल रही हैं और यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कथित अपराधों की योजना कैसे बनाई गई, उन्हें अंजाम देने में किन लोगों ने मदद की और पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित होता था।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस आरोपी को उन इलाकों में वापस लेकर गई जहां पहले अपराध होने के आरोप हैं। वहां अधिकारियों ने कथित घटनाओं के कुछ हिस्सों को दोबारा दोहराकर सबूतों और घटनाक्रम की पुष्टि करने की कोशिश की। पूरे ऑपरेशन के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आकाश सिंह पर हावड़ा में जबरन वसूली गिरोह चलाने के आरोप हैं। उसके खिलाफ एक पुलिस अधिकारी पर फायरिंग करने का आरोप भी दर्ज है। जांच एजेंसियां अब उससे जुड़े कई पुराने और लंबित मामलों की दोबारा जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि उसके नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
हालांकि इस पूरे ऑपरेशन का सबसे ज्यादा ध्यान आरोपी की सार्वजनिक प्रस्तुति ने खींचा है। आलोचकों का कहना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान आरोपियों को इस तरह सार्वजनिक रूप से पेश करना मानवाधिकार और पुलिस आचरण से जुड़े सवाल खड़े करता है। वहीं पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच की गई। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस पुराने मामलों से जुड़े नए सुराग जुटाने में लगी हुई है।
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