कार्यक्रम में निरसा के सीपीआई एमएल विधायक अरूप चटर्जी, सिंदरी के विधायक चंद्रदेव महतो समेत विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सभा में वक्ताओं ने शिबू सोरेन के नेतृत्व में चले झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आंदोलनकारियों ने मांग की कि गुरुजी के जीवन, झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण में उनकी भूमिका को राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और जनसंघर्षों से परिचित हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से बाहरी लोगों को नौकरियां मिल रही हैं, जो राज्य आंदोलन की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि झारखंड के संसाधनों और सरकारी नौकरियों पर पहला अधिकार राज्य के युवाओं का होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
अरूप चटर्जी ने कहा कि गुरुजी ने जल, जंगल, जमीन और झारखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके विचारों और संघर्षों को केवल स्मृति समारोहों तक सीमित रखने के बजाय सरकारी नीतियों और शिक्षा व्यवस्था में भी स्थान मिलना चाहिए।



