सेना प्रमुख ने समझाया कि आज की दुनिया एक तरह के लगातार चलने वाले संघर्ष के दौर में है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि हर बार युद्ध आधिकारिक रूप से घोषित हो, लेकिन अलग-अलग जगहों पर, अलग-अलग तरीकों से टकराव चलता रहता है। ऐसे माहौल में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सभी क्षेत्रों के बीच तालमेल कैसे बनाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में एक छोटे स्तर के अधिकारी के पास भी पहले से कहीं ज्यादा साधन हैं। जैसे ड्रोन, निगरानी उपकरण, साइबर नेटवर्क और सटीक जानकारी देने वाली तकनीक। इससे उसकी ताकत और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। सेना प्रमुख ने यहां ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र भी किया।
सेना प्रमुख ने बताया कि इस ऑपरेशन में सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर काम किया। जमीन से मिली जानकारी, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक इनपुट, वायुसेना की सटीक कार्रवाई और नौसेना की रणनीतिक तैनाती, इन सबके तालमेल से ही सफलता मिली। उन्होंने साफ कहा कि अब कोई एक हिस्सा अकेले जीत नहीं दिला सकता, बल्कि सबको मिलकर काम करना है।
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना भी नए तरीके के युद्ध के लिए खुद को तैयार कर रही है। इसके लिए नए-नए अभ्यास किए जा रहे हैं, नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं और आधुनिक तकनीक को शामिल किया जा रहा है। सेना में ड्रोन यूनिट, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी इकाइयों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि हर क्षेत्र में एक साथ काम किया जा सके।
आगे की दिशा बताते हुए उन्होंने कहा कि सेना को अपनी रणनीति में बदलाव लाना आवश्यक है। संसाधनों को अलग-अलग जगहों पर फैलाना होगा, कमांड को नीचे तक मजबूत बनाना होगा, और हर स्थिति में तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करनी होगी। इसके साथ ही तकनीक का सही उपयोग बहुत जरूरी है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसान के हाथ में रहना चाहिए।
सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में वही सेना मजबूत होगी, जो तकनीक को समझेगी, उसे अपनाएगी और अलग-अलग क्षेत्रों को मिलाकर एक साथ काम करेगी। इसलिए अब सैन्य कमांडरों को सिर्फ पारंपरिक सैन्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि तकनीकी समझ भी विकसित करनी होगी। यही भविष्य के युद्ध की सबसे बड़ी जरूरत है।
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