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Friday, January 2, 2026
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Hijab Not Allowed: कर्नाटक की 2 छात्राओं ने छोड़ा एग्जाम !

15 मार्च को मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाली एक पूर्ण पीठ ने कहा कि कुरान मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं करता है।

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हिजाब को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय जाने वाली आठ मुस्लिम छात्रओं में से कम से कम दो ने उडुपी जिले में प्रवेश से वंचित होने के बाद अपने दूसरे वर्ष के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज (पीयूसी) की परीक्षा नहीं देने का फैसला किया है। सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए एक वीडियो में दो छात्राओं- रेशम और आलिया असदी- को कॉलेज से दूर जाते हुए देखा गया।

उडुपी गवर्नमेंट गर्ल्स पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल रुद्रे गौड़ा ने एचटी को बताया, “आलिया और रेशम ने आज सुबह अपना हॉल टिकट लिया।” हालांकि, उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों को रैंडम बनाया गया है इसलिए उन्हें नहीं पता कि उनके छात्र परीक्षा में शामिल हुए या नहीं। पीयूसी द्वितीय वर्ष की परीक्षा शुक्रवार से शुरू हुई और कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों का आज (शुक्रवार को) पेपर है। गौड़ा ने कहा कि कुछ छात्र जो आंदोलन का हिस्सा थे, वे विज्ञान वर्ग से हैं और उसकी परीक्षा शनिवार को होगी।

दिसंबर 2021 में, कम से कम आठ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। 1 जनवरी को, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल (सीडीसी) ने कैंपस के अंदर हिजाब पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया, जिसके विरोध में कॉलेज की इमारत के बाहर (कैंपस के भीतर) छात्र धरने पर बैठ गए थे।

हालांकि, कॉलेज के अधिकारियों ने कहा कि हिजाब को कक्षाओं के अंदर कभी भी अनुमति नहीं दी गई। फरवरी तक, जैसे ही पूरे राज्य में विवाद फैल गया, कुछ छात्रों ने भगवा शॉल पहनकर विरोध किया।

3 फरवरी को, सरकारी पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा कम से कम 25 हिजाब पहनने वाली छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश से रोक दिया और गेट बंद करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। जहां इस मुद्दे को पहली बार उडुपी के सरकारी कॉलेज में उठाया गया था, वहीं इसका प्रभाव राज्य के अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी महसूस किया गया है।

मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचा। 15 मार्च को मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाली एक पूर्ण पीठ ने कहा कि कुरान मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं करता है। कोर्ट ने अपने 129-पृष्ठ के फैसले में कहा कि “हिजाब एक धार्मिक मसला नहीं है” और स्कूलों के फैसले पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

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