ऐसा कहा जाता है कि सूर्य नमस्कार केवल आसनों का एक क्रम नहीं, बल्कि शरीर, श्वास और मन को जोड़ने वाली एक संपूर्ण साधना है। यह योग मुद्राओं का एक ऐसा गतिशील क्रम है, जो हमारे शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करता है।
सूर्य नमस्कार 8 आसनों (प्रणमासन, हस्त उत्तानासन, हस्त पादासन, अश्व संचलनासन, दंडासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंगासन और पर्वतासन) का समूह है, जो पूरे शरीर में ऊर्जा और रक्त संचार को बेहतर करता है। यह फेफड़ों को मजबूत कर बलगम की समस्या को दूर करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्य नमस्कार एक संपूर्ण योग अभ्यास है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों बेहतर बनाता है। इसके रोजाना अभ्यास करने से शारीरिक शक्ति और शरीर में लचीलापन बढ़ता है और साथ ही रक्त संचार बेहतर होता है और तनाव और चिंता कम होती है।
यह पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह 8 आसनों का एक समूह है, जिसमें कुल 12 चरण होते हैं, जो शरीर को सक्रिय करते हैं और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करते हैं।
सूर्य नमस्कार करने से मसल्स एक्टिव होती हैं और शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जिससे वजन तेजी से घटता है। शुरुआती दिनों में इसे धीरे-धीरे करें और समय के साथ इसके स्टेप्स बढ़ाएं, ताकि शरीर को अधिक फायदा मिल सके।
इसे करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और नमस्ते कर सांस लेते हुए, हाथों को पीछे कमर की ओर ले जाएं और सिर और ऊपरी धड़ को थोड़ा पीछे झुकाएं। अब सांस छोड़ते हुए कमर से आगे झुकें। हथेलियों को पैरों के बगल में जमीन पर रखें।
अब शरीर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर झुकाएं।
इसके बाद सांस रोकते हुए पहले घुटने, फिर छाती और अंत में ठुड्डी को जमीन से स्पर्श कराएं और कूल्हे हल्के ऊपर उठे रहें और सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को नाभि तक ऊपर उठाएं। कोहनियों को हल्का मोड़कर रखें।
धीरे-धीरे शरीर को सीधा करें और हाथों को ऊपर उठाकर पीछे की ओर झुकें। अब शरीर को सीधा करें और हाथों को जोड़कर शुरुआती स्थिति में आ जाएं।
रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आप अपनी सेहत का खास ख्याल रख सकते हैं, लेकिन अगर आपको गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो इसे करने से बचें या फिर डॉक्टर से सलाह लें।



