पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। BNP ने जहां एक ओर BJP को जीत की बधाई दी, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीस्ता जल-बंटवारे समझौते में अड़ंगा डालने की बातें याद दिलाई।
एजेंसी ANI से बातचीत में BNP के सूचना सचिव अज़ीज़ुल बारी हेलाल ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा का प्रदर्शन सराहनीय रहा है और इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार के आने से लंबे समय से लंबित तीस्ता जल समझौते पर प्रगति संभव हो सकेगी। हेलाल ने कहा, “पहले हमने देखा कि ममता बनर्जी तीस्ता बैराज समझौते में बाधा थीं। अब, जब भाजपा ने सुवेंदु के नेतृत्व में जीत हासिल की है, तो यह समझौता आगे बढ़ सकता है, जिसकी इच्छा बांग्लादेश और नरेंद्र मोदी सरकार दोनों की रही है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि नई सरकार इस परियोजना को लागू करने में सहायक साबित हो सकती है।
#WATCH | Dhaka, Bangladesh | On the results of West Bengal assembly elections 2026, BNP Information Secretary Azizul Baree Helal says, "I am stunned that in West Bengal, TMC, was massively defeated after holding power for a long time. I congratulate the winner, Suvendu Adhikari's… pic.twitter.com/hK0JvaxuNO
— ANI (@ANI) May 5, 2026
तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित प्रमुख विवादों में से एक रहा है। वर्ष 1996 में गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर जल वितरण का समझौता हुआ था, लेकिन तीस्ता को लेकर अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश का कहना है कि सूखे के मौसम में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से वहां के किसानों और आम लोगों की आजीविका प्रभावित होती है।
2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान एक प्रस्ताव रखा गया था, जिसके तहत बांग्लादेश को 37.5 प्रतिशत और भारत को 42.5 प्रतिशत जल मिलने की बात थी। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के चलते यह समझौता लागू नहीं हो सका था। राज्य सरकार का तर्क था कि इससे राज्य के कृषि हितों को नुकसान पहुंचेगा।
इससे पहले 1983 में एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 प्रतिशत और भारत को 39 प्रतिशत पानी देने की बात तय हुई थी, जबकि शेष 25 प्रतिशत पर निर्णय बाद में होना था। लेकिन यह व्यवस्था भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 साझा नदियां हैं, जिनमें से अब तक केवल गंगा और कुशियारा नदियों पर ही औपचारिक समझौते हो पाए हैं। तीस्ता और फेनी जैसी अन्य नदियों पर बातचीत जारी है।
BNP ने यह भी संकेत दिया कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग के कई क्षेत्र हैं, जिनमें जल बंटवारा और सीमा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। पार्टी का मानना है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने से इन मुद्दों पर तेजी से प्रगति हो सकती है और दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।
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