भटकटैया: जंगल का रहस्यमयी पौधा, हर हिस्से में औषधीय गुण!

भटकटैया का हर हिस्सा फूल, तना, पत्ते और बीज औषधीय गुणों से भरा हुआ है। इसके फूल बैंगनी और सफेद रंग के होते हैं और पत्ते हरे और कांटेदार।

भटकटैया: जंगल का रहस्यमयी पौधा, हर हिस्से में औषधीय गुण!

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जंगल में कई ऐसे पौधे होते हैं जो देखने में साधारण लगते हैं, लेकिन उनके अंदर कमाल का औषधीय खजाना छिपा होता है। ऐसा ही एक पौधा है भटकटैया, जिसे लोग कटेरी या कंटकारी के नाम से भी जानते हैं। यह सिर्फ दिखने में ही खतरनाक लगता है, पर असल में यह आपके शरीर और दिमाग दोनों के लिए वरदान है।

भटकटैया का हर हिस्सा फूल, तना, पत्ते और बीज औषधीय गुणों से भरा हुआ है। इसके फूल बैंगनी और सफेद रंग के होते हैं और पत्ते हरे और कांटेदार। इसकी जड़ भी कम काम की नहीं है। आयुर्वेद में इसे पेट की तकलीफ, सूजन और पाचन संबंधी समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता है।

इस पौधे की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं: छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी और श्वेत कंटकारी। माइग्रेन, सिरदर्द, अस्थमा और गठिया जैसी परेशानियों में इसका इस्तेमाल बेहद फायदेमंद माना जाता है। यहां तक कि वैज्ञानिकों के अनुसार इसके बीज में मौजूद सिलिबिनिन नामक तत्व ब्रेन ट्यूमर और पिट्यूटरी ग्रंथि में होने वाली कुशिंग बीमारी में भी लाभ पहुंचा सकता है।

भटकटैया के फल हरे रंग के होते हैं और पकने के बाद पीले हो जाते हैं। बीज छोटे, चिकने और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसके कड़वे तने और फूल पैरों में जलन और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। ठंड में खांसी या गले की खराश में भटकटैया की जड़ और गुडुची का काढ़ा पीना बहुत लाभकारी है। साथ ही यह अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है।

हालांकि, प्राकृतिक औषधि होने के बावजूद भी इसके गलत या अधिक मात्रा में सेवन करने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। इसी कारण जरूरी है कि किसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए इसका सेवन या उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह लें, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और स्तनपान कराने वाली माताओं को बिना सलाह के न दें।

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