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Saturday, April 18, 2026
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सेनाध्यक्ष ने की नव नियुक्त कमांड सूबेदार मेजर्स के साथ बातचीत!

सेनाध्यक्ष ने मजबूत नेतृत्व और साझा उत्तरदायित्व के महत्व को उजागर किया, जिससे रक्षा व्यवस्था की समग्र क्षमता और दृढ़ता को सुदृढ़ किया जा सके।

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थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना में नवनियुक्त कमांड सूबेदार मेजर्स से मुलाकात की है। सेनाध्यक्ष ने कमांड सूबेदार मेजर्स के साथ एक केंद्रित चर्चा भी की। इस चर्चा का उद्देश्य सैनिकों के कल्याण और मनोबल को बढ़ाना था।

सेना के मुताबिक इस संवाद के दौरान, जमीनी स्तर पर नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। सेनाध्यक्ष ने एक संगठित एवं प्रेरित बल के निर्माण में इन अधिकारियों की जिम्मेदारी पर बल दिया। सेनाध्यक्ष ने मजबूत नेतृत्व और साझा उत्तरदायित्व के महत्व को उजागर किया, जिससे रक्षा व्यवस्था की समग्र क्षमता और दृढ़ता को सुदृढ़ किया जा सके।

गौरतलब है कि सेनाध्यक्ष लगातार विभिन्न स्तरों पर सैन्य अधिकारियों व जवानों से बातचीत कर रहे हैं। बीते दिनों उन्होंने नई दिल्ली में ‘चीफ्स चिंतन’ नामक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान पूर्व सेना प्रमुखों के साथ भी एक गहन विचार-विमर्श का किया था। यह दो दिवसीय कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया गया था।

सेना के मुताबिक ऑपरेशन ‘सिन्दूर’ के बाद आयोजित इस संवाद का उद्देश्य पूर्व सेनाध्यक्षों के विशाल अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण का लाभ उठाते हुए भारतीय सेना के भविष्य को दिशा देना था। वहीं हाल ही में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कश्मीर क्षेत्र का दौरा किया है। इस दौरान सेना प्रमुख ने कश्मीर में सुरक्षा ग्रिड की व्यापक समीक्षा की थी।

उन्होंने अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए की जा रही सुरक्षा संबंधी तैयारियों का भी जायजा लिया था। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना प्रमुख को वर्तमान अभियानगत स्थिति और व्यापक रणनीतिक परिदृश्य की जानकारी दी। उन्हें अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए की जा रही सुरक्षा व्यवस्था से भी अवगत कराया गया था।

गौरतलब है कि भारतीय सेना ने अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित बनाने और यात्रा की निर्बाध सम्पन्नता सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑपरेशन शिवा 2025’ शुरू किया है। इस बार यहां सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत रखा गया है।

विशेष तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकियों से उत्पन्न खतरे के मद्देनजर यहां पूरे इलाके में कड़ी चौकसी बरती जा रही है। यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए 8,500 से अधिक सैनिकों की तैनाती की गई है। एक गतिशील आतंकवाद विरोधी ग्रिड, रोकथाम आधारित सुरक्षा तैनाती और कॉरिडोर सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।

सेना के मुताबिक यहां 50 से अधिक काउंटर-यूएएस और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स के साथ एक मजबूत ड्रोन रोधी ग्रिड भी तैनात है। यात्रा मार्गों एवं पवित्र गुफा की लाइव निगरानी की जा रही है। पुल निर्माण, ट्रैक चौड़ीकरण और किसी भी आपदा से निपटने के लिए सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स को तैनात किया गया है।

150 से अधिक डॉक्टर और चिकित्सा कर्मी, 2 एडवांस ड्रेसिंग स्टेशन, 9 मेडिकल एड पोस्ट, एक 100-बेड का अस्पताल और 26 ऑक्सीजन बूथ उपलब्ध कराए गए हैं।
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