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अमेरिका से जल्द नई व्यापार वार्ता को तैयार चीन, ट्रम्प बोले “100% टैरिफ टिकाऊ नहीं”

ट्रम्प ने यह भी धमकी दी है कि अमेरिका चीन के खिलाफ नए एक्सपोर्ट कंट्रोल्स लागू कर सकता है, जिससे किसी भी आवश्यक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति रोक दी जाएगी।

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चीन और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच बीजिंग ने संकेत दिया है कि वह जितनी जल्दी संभव हो सके नई व्यापार वार्ता शुरू करने के लिए तैयार है। दोनों देशों के बीच टैरिफ और निर्यात नियंत्रण को लेकर फिर से तनाव बढ़ रहा है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, बीजिंग के उप-प्रधानमंत्री और मुख्य वार्ताकार हे लीफेंग तथा अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बातचीत हुई। इस चर्चा को “खुली, गहन और रचनात्मक” बताया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस महीने की शुरुआत में चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जब बीजिंग ने अपने रेयर अर्थ्स एक्सपोर्ट कंट्रोल को बढ़ाते हुए पाँच नए तत्वों और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर सख्ती की घोषणा की थी। उस समय ट्रम्प ने कहा था कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का कार्यक्रम रद्द कर सकते हैं। हालांकि अब रिपोर्ट्स बताती हैं कि दोनों नेताओं की मुलाकात दक्षिण कोरिया में तय समय पर ही होगी।

लेकिन अब ट्रम्प ने अपने रुख में नरमी दिखाते हुए कहा है कि 100% टैरिफ टिकाऊ नहीं है। उन्होंने फॉक्स बिज़नेस नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “यह टिकाऊ नहीं है, लेकिन आंकड़ा वही है। उन्होंने मुझे यह कहने पर मजबूर किया।” ट्रम्प ने यह भी जोड़ा कि उन्हें चीन की व्यापारिक नीतियों और निर्यात नियंत्रण के जवाब में यह ऊँचा आंकड़ा बताना पड़ा।

ट्रम्प ने यह भी धमकी दी है कि अमेरिका चीन के खिलाफ नए एक्सपोर्ट कंट्रोल्स लागू कर सकता है, जिससे किसी भी आवश्यक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति रोक दी जाएगी। विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम यदि लागू किया गया तो सेमीकंडक्टर और एआई टेक्नोलॉजी सेक्टर पर बड़ा असर डालेगा।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि दोनों देशों के बीच अब तनाव में कुछ कमी आई है। उन्होंने बताया कि वह अगले हफ्ते चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लीफेंग से मलेशिया में मुलाकात करेंगे, ताकि दोनों राष्ट्राध्यक्षों की आगामी वार्ता की तैयारी की जा सके। बेसेंट ने कहा, “हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि बातचीत रचनात्मक रहे और टकराव की दिशा में न जाए।” हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “चीन अपनी नई रेयर-अर्थ नीतियों के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।”

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बीजिंग और वॉशिंगटन दोनों ही अब व्यापारिक युद्ध से थके हुए दिख रहे हैं, और नई वार्ता एक रीसेट मोमेंट साबित हो सकती है।

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