दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक स्थिति में बना हुआ है। रविवार की सुबह भी राजधानी के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘बहुत खराब’ से लेकर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी शिकायतें बढ़ने लगी हैं। राजधानी में धुंध और धुएं की चादर छाई हुई है, जिससे दृश्यता भी प्रभावित हो रही है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली एम्स क्षेत्र का एक्यूआई ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच गया है। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 430 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। वहीं अक्षरधाम और उसके आसपास के इलाकों में घनी जहरीली धुंध छाई हुई है। इस क्षेत्र का एक्यूआई 412 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसी तरह, लोधी रोड का एक्यूआई 377 पर है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में गिना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं और ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक तत्व वायुमंडल में फंस गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोगों को सुबह और शाम के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
वहीं, दिल्ली सरकार ने भी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई सख्त कदम लागू किए हैं। इसमें निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल वाहनों के संचालन में प्रतिबंध और स्कूलों में छुट्टी की संभावना जैसे उपाय शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियां और एलर्जी के मामले बढ़ सकते हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और प्रदूषण नियंत्रण में योगदान दें।
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