श्रीलंका में डेंगू का कहर जारी, स्वास्थ्य महकमे ने कहा ‘मानसून में संक्रमण दर बढ़ सकती है’

श्रीलंका में डेंगू का कहर जारी, स्वास्थ्य महकमे ने कहा ‘मानसून में संक्रमण दर बढ़ सकती है’

Dengue continues to wreak havoc in Sri Lanka, health department says infection rate may increase during monsoon

श्रीलंका में डेंगू का कहर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। जनवरी 2026 से अब तक इस वायरल संक्रमण से 14 लोगों की मौत हो गई है वहीं 27,754 मामले दर्ज किए गए हैं। श्रीलंका के स्वास्थ्य महकमे का कहना है कि देश के सभी 25 जिलों से संक्रमण रिपोर्ट हो रही हैं।

राष्ट्रीय डेंगू नियंत्रण इकाई ने बताया कि 2025 की तुलना में संख्या बढ़ी है। सबसे अधिक संक्रमण पश्चिमी प्रांत में दर्ज किया गया, जबकि मातारा, गाले, रत्नापुरा, कालुतारा और कैंडी में भी 2026 के पहले चार महीनों के दौरान बड़ी संख्या में लोग इससे पीड़ित हुए।

राष्ट्रीय डेंगू नियंत्रण इकाई की सामुदायिक चिकित्सा विशेषज्ञ प्रिसिला समरवीरा ने स्वास्थ्य मंत्रालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि मानसून की बारिश से संक्रमण और फैल सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि घरों की तुलना में स्कूलों, कार्यस्थलों, धार्मिक संस्थानों के अलावा सरकारी और निजी संस्थाओं में मच्छरों के प्रजनन में अधिक वृद्धि देखी गई है। डेंगू के फैलाव का प्रमुख कारण कचरे का गलत तरीके से निपटान बताया गया है, जिससे बचाव के लिए जनता के पूर्ण सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

जनता को यह भी सलाह दी गई है कि यदि बुखार के साथ मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, मतली या त्वचा पर चकत्ते जैसे कम-से-कम दो लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

डेंगू (जिसे ब्रेक-बोन फीवर भी कहा जाता है) एक वायरल संक्रमण है, जो मच्छरों के माध्यम से लोगों में फैलता है। इसके पीड़ित समशीतोष्ण क्षेत्रों की तुलना में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं।

अधिकांश लोगों में डेंगू के लक्षण नहीं दिखाई देते। जिनमें दिखते हैं उनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, मतली और त्वचा पर चकत्ते सबसे सामान्य लक्षण होते हैं। अधिकांश मरीज 1–2 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में डेंगू गंभीर रूप ले लेता है, जिसके लिए अस्पताल में इलाज की आवश्यकता पड़ती है।

गंभीर मामलों में डेंगू जानलेवा साबित होता है।

मच्छरों के काटने से बचकर, विशेष रूप से दिन के समय, डेंगू के खतरे को कम किया जा सकता है। फिलहाल डेंगू का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है और इसका उपचार मुख्य रूप से पेन मैनेजमेंट (दर्द प्रबंधन) के जरिए किया जाता है।

दूसरी बार संक्रमण के शिकार लोगों में डेंगू खतरनाक रूप ले सकता है। गंभीर लक्षण अक्सर बुखार उतरने के बाद दिखाई देते हैं, जिनमें पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, तेज सांस चलना, मसूड़ों या नाक से खून आना और अत्यधिक थकान शामिल हैं।

हाल के दशकों में दुनिया भर में डेंगू के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वर्ष 2000 में जहां ये संख्या 5,05,430 थी वहीं 2024 में उससे बढ़कर 1.46 करोड़ तक पहुंच गई। हालांकि, अधिकांश मामले हल्के या बिना लक्षण वाले होते हैं और स्वयं ठीक हो जाते हैं, इसलिए वास्तविक आंकड़े अक्सर रिपोर्ट नहीं हो पाते। यह बीमारी अब 100 से अधिक देशों में स्थानिक (एंडेमिक) बन चुकी है।

वर्ष 2024 में 12 महीनों की अवधि में अब तक के सबसे अधिक डेंगू मामले दर्ज किए गए, जिसने सभी महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों को प्रभावित किया। 2024 के दौरान लगातार संक्रमण और मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण वैश्विक स्तर पर 1.46 करोड़ से अधिक मामले और 12,000 से ज्यादा डेंगू से संबंधित मौतें दर्ज की गईं। इनमें अमेरिका क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक रहा, जहां 1.3 करोड़ से अधिक मामले रिपोर्ट किए गए।

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