अमेरिका-इजराईल बनाम ईरान में जारी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर अब भारत के एविएशन सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। एयर इंडिया ने जून से अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में बड़े स्तर पर कटौती की तैयारी शुरू कर दी है। कई उड़ानें रद्द की जा रही हैं, जबकि कई रूट्स पर सेवाओं की आवृत्ति कम की जा रही है। कुछ रद्दीकरण पूरे शेड्यूलिंग सीजन तक जारी रह सकते हैं।
शेड्यूल ट्रैकिंग वेबसाइट एयरोरूट्स की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया जून से अगस्त के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बड़े बदलाव कर रही है। यह वही अवधि है जिसे पारंपरिक तौर पर एविएशन इंडस्ट्री में कमजोर सीजन माना जाता है।
दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने की अपील की थी। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक तेल कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने से भी एयर इंडिया की उत्तर अमेरिकी उड़ानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है, क्योंकि कई फ्लाइट्स को बीच में रीफ्यूलिंग स्टॉप लेने पड़ रहे हैं।
एयर इंडिया के सिंगापुर नेटवर्क में बड़ी कटौती की जा रही है। चेन्नई और मुंबई से चलने वाली डबल डेली फ्लाइट्स रद्द की जा रही हैं, जबकि दिल्ली से जुलाई में केवल चार उड़ानें प्रति सप्ताह संचालित होंगी। बैंकॉक के लिए दिल्ली से चार दैनिक उड़ानों को घटाकर तीन किया जा रहा है और मुंबई से भी छह साप्ताहिक उड़ानें कम होंगी।
इसके अलावा, काठमांडू के लिए उड़ानों की संख्या छह से घटाकर चार की जा रही है। कुआलालंपुर के लिए सप्ताह में दस उड़ानों को घटाकर पांच किया जाएगा, जबकि दिल्ली से माले की सेवा अस्थायी रूप से बंद की जा रही है। हाल ही में शुरू की गई शंघाई सेवा में भी कटौती की जा रही है। मुंबई से ढाका की उड़ानें रद्द की जा रही हैं और कोलंबो रूट पर भी फ्रीक्वेंसी घटेगी।
यूरोप नेटवर्क में भी कई शहर प्रभावित होंगे। वियना, कोपेनहेगन, रोम और ज्यूरिख के लिए उड़ानों की संख्या सप्ताह में चार से घटाकर सप्ताह में तीन की जा रही है। पेरिस के लिए दो दैनिक उड़ानों की जगह अब केवल एक उड़ान संचालित होगी। मिलान रूट पर भी पांच की बजाय चार उड़ानें प्रति सप्ताह चलेंगी।
सबसे बड़ा असर उत्तर अमेरिकी नेटवर्क पर दिखाई दे रहा है। शिकागो के लिए उड़ानें जून से अक्तूबर तक निलंबित की जा रही हैं। दिल्ली से नेवार्क और मुंबई से न्यूयॉर्क की उड़ानें जून से अगस्त के बीच बंद रहेंगी। सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो और वैंकूवर के लिए भी सेवाओं में कटौती जारी रहेगी।
ऑस्ट्रेलिया रूट पर भी सेवाएं घटाई जा रही हैं। पहले जहां सप्ताह में सात उड़ानें थीं, उन्हें पांच किया गया था और अब जुलाई-अगस्त में इसे चार तक सीमित किया जाएगा।
हालांकि एयर इंडिया ने सोशल मीडिया पर चल रही उन अफवाहों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि ईंधन की कमी के कारण सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद की जा रही हैं। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि फिलहाल देश में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कोई ऐसी कमी नहीं है जिससे उड़ानें रोकनी पड़ें।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लागत में भारी वृद्धि ने एयरलाइंस पर दबाव बढ़ा दिया है। सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF कीमतों में अप्रैल में केवल 25 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी थी और मई में दरें स्थिर रखीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संचालन पर कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर पड़ा है। मार्च से तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया को पिछले वित्त वर्ष में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ था। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मांग में गिरावट और बढ़ती लागत के कारण एयरलाइन को अपने नेटवर्क की दोबारा समीक्षा करनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों के युद्ध ने भारतीय एविएशन सेक्टर, खासकर एयर इंडिया के निजीकरण के बाद की विस्तार योजनाओं को बड़ा झटका दिया है।
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