क्या पाकिस्तान ने ट्रम्प का प्रस्ताव ठुकराया? फिलिस्तीन और गाजा पर रुख बरकरार

अब्राहम समझौते के मुद्दे पर विदेश मंत्री इशाक डार की प्रतिक्रिया

क्या पाकिस्तान ने ट्रम्प का प्रस्ताव ठुकराया? फिलिस्तीन और गाजा पर रुख बरकरार

Did Pakistan reject Trump's offer? Standing firm on Palestine and Gaza

पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक दार ने वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबीओ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि इस्लामाबाद अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है।

शुक्रवार(29 मई) को वॉशिंग्टन में हुई इस मुलाकात के दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने के लिए तैयार है। यह सवाल ऐसे समय में पूछा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संघर्ष को समाप्त करने के लिए संभावित समझौते के हिस्से के रूप में कई अरब और मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने का आह्वान किया है।

पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों के बीच पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है और दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। हालांकि इशाक डार उपप्रधानमंत्री भी हैं, लेकिन ईरान संघर्ष में मध्यस्थता से जुड़े पाकिस्तान के प्रयासों का नेतृत्व मुख्य रूप से असीम मुनीर कर रहे हैं।

वॉशिंग्टन में डार और रुबियो की बैठक के दौरान एक पत्रकार ने जोर से पूछा, “क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देगा?” दोनों नेताओं ने इस प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया और सवाल अनुत्तरित रह गया।

बाद में पत्रकारों से बातचीत में डार ने कहा, “पाकिस्तान फिलिस्तीन और गाजा के मुद्दे पर अपनी स्थिति पर कायम है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद तब तक इजरायल के प्रति अपनी नीति में बदलाव पर विचार नहीं करेगा, जब तक इजरायल एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता।

सोमवार को ट्रम्प ने कहा था कि ईरान संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे समझौते के तहत उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन से अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का आग्रह किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के संकेत नहीं दिए हैं। वहीं, जिन अन्य देशों का उल्लेख किया गया था, उन्होंने भी ट्रम्प के आह्वान पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों के तहत ट्रम्प के पहले कार्यकाल में वॉशिंग्टन ने अब्राहम समझौतों की मध्यस्थता की थी। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को ने इजरायल के साथ राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करने के लिए इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें सूडान भी शामिल था, हालांकि उसके साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है।

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