जांच एजेंसी के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कंपनी के प्रमोटरों और उनसे जुड़ी अन्य संस्थाओं ने कथित रूप से जाली दस्तावेज तैयार किए और धोखाधड़ी के जरिए कई जमीनों पर कब्जा किया। इन जमीनों में कुछ सरकारी भूमि भी शामिल बताई जा रही हैं। आरोप है कि इसके बाद इन जमीनों पर बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू किए गए और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया।
ईडी का कहना है कि आरोपियों ने फर्जी कागजों के आधार पर खुद को जमीन का वैध मालिक बताया और आम लोगों को अपने प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। इस तरह बड़ी रकम जुटाई गई, जिसकी अब मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच की जा रही है। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि इन पैसों का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया और क्या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।
जांच के दौरान मर्लिन ग्रुप के राज्य सरकार के कुछ वरिष्ठ राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ संभावित संबंध भी सामने आए हैं। ईडी अब इन संबंधों, उनकी भूमिका और किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है।
छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं, जिन्हें अब खंगाला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। फिलहाल ईडी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई हो सकती है।
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