अमेरिका में प्रवासी वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका को लेकर बहस लंबे समय से जारी है। इसी बीच प्रसिद्ध भौतिकशास्त्र के वैज्ञानीक और लेखक मिचियो काकू का पुराना बयान फिर से चर्चा में है। काकू ने एक दशक पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि H-1B वीज़ा कार्यक्रम को खत्म कर दिया गया, तो अमेरिका का वैज्ञानिक ढांचा और नवाचार आधारित उद्योग ढह जाएंगे। उन्होंने H-1B को “जीनियस वीज़ा” बताते हुए कहा था कि इसके बिना सिलिकॉन वैली का अस्तित्व ही संभव नहीं होता।
जब डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर सख्ती शुरू भी नहीं की थी उसी वक्त काकू ने चेतावनी दी थी । राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने प्रवासियों पर दबाव बढ़ाने के लिए H-1B वीज़ा की फीस 100,000 डॉलर तक कर दी। यह वीज़ा अमेरिकी कंपनियों को विदेश से उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेज़न और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियां हजारों भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को इसी के तहत नियुक्त करती हैं।
काकू ने एक वीडियो में साफ कहा था, “अमेरिका के पास एक गुप्त हथियार है, और वह है H-1B। इसके बिना इस देश की वैज्ञानिक व्यवस्था ढह जाएगी। गूगल को भूल जाइए, सिलिकॉन वैली को भूल जाइए। H-1B के बिना कोई सिलिकॉन वैली होती ही नहीं। और H-1B क्या है? यह ‘जीनियस वीज़ा’ है।” उन्होंने आगे कहा कि विदेशी जन्मे वैज्ञानिक न केवल अमेरिका की तकनीकी प्रगति के इंजन हैं, बल्कि नई-नई इंडस्ट्री भी खड़ी करते हैं।
काकू ने यह भी चेतावनी दी थी कि अमेरिका में आधे से ज्यादा पीएचडी शोधार्थी विदेशी मूल के हैं। उनके अपने विश्वविद्यालय में तो 100% पीएचडी उम्मीदवार विदेशी थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया के “ब्रेन” को सोख लेता है, लेकिन अब यह दिमाग चीन और भारत जैसे देशों में लौट रहे हैं। यही वजह है कि इन देशों में अब नए “सिलिकॉन वैली” उभरते दिख रहे हैं।
Michio Kaku on H1B being the secret weapon of the US. pic.twitter.com/m2z7BDWCwW
— We, the people of India (@India_Policy) September 20, 2025
काकू की कही बातें आज हकीकत बनती नजर आ रही हैं। ट्रंप की सख्ती और उनकी दक्षिणपंथी सहयोगी लॉबी की एंटी-इमिग्रेंट नीतियों के चलते बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और स्कॉलर अमेरिका छोड़कर कनाडा, चीन और भारत का रुख कर रहे हैं।
कई वर्षों से अमेरिका में H-1B वीज़ा को लेकर यह तर्क दिया जाता रहा है कि यह अमेरिकी नौकरियां छीनता है। लेकिन काकू का मानना था कि H-1B वीज़ाधारक ऐसे जटिल काम करते हैं जिन्हें अमेरिकी नागरिक करने में सक्षम नहीं हैं। उल्टा, वे नई नौकरियां पैदा करते हैं और पूरे उद्योग खड़े करते हैं।
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