भारत की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को स्वदेशी हेलीकॉप्टर निर्माण के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। HAL ने पवन हंस से ₹1,800 करोड़ का ऑर्डर हासिल किया है, जिसके तहत कंपनी 10 Dhruv-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति करेगी।
Dhruv-NG, HAL द्वारा विकसित स्वदेशी Dhruv प्लेटफॉर्म का उन्नत संस्करण है, जिसे नागरिक, रक्षा और यूटिलिटी उपयोग के लिए बेहतर क्षमताओं के साथ डिजाइन किया गया है। इस हेलीकॉप्टर में उन्नत एवियोनिक्स, बेहतर परफॉर्मेंस और उच्च सुरक्षा मानकों को शामिल किया गया है। सरकारी हेलीकॉप्टर सेवा कंपनी पवन हंस हेलीकॉप्टर्स का उपयोग विभिन्न अभियानों में करेगा, जिससे उसकी परिचालन क्षमता और बहुउद्देशीय उपयोगिता में इज़ाफा होगा।
इसी बीच, HAL ने रूस की कंपनी PJSC यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के साथ एक महत्वपूर्ण संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) किया है। इस साझेदारी के तहत भारत में सुखोई SJ-100 सुपरजेट विमान का निर्माण किया जाएगा। SJ-100 एक ट्विन-इंजन, नैरो-बॉडी क्षेत्रीय यात्री विमान है, जो पहले से ही दुनिया भर में वाणिज्यिक सेवा में है। वर्तमान में 16 एयरलाइंस के बेड़े में इसके 200 से अधिक विमान परिचालित हैं।
इस समझौते के अनुसार, HAL को SJ-100 का भारत में घरेलू उपयोग के लिए उत्पादन करने का अधिकार मिलेगा। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है। अनुमान है कि अगले एक दशक में देश को क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए 200 से अधिक रीजनल जेट्स की आवश्यकता होगी।
HAL और UAC के बीच यह सहयोग पिछले अक्टूबर में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) का विस्तार है, जिसमें नागरिक कम्यूटर विमानों के उत्पादन पर सहमति बनी थी। HAL का मानना है कि SJ-100, भारत की UDAN क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत कम दूरी की उड़ानों के लिए एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है। इस समझौते के तहत HAL को विमान के स्थानीय प्रमाणन की जिम्मेदारी, निर्माण और बिक्री का लाइसेंस मिलेगा, जबकि UAC तकनीकी सहायता, डिजाइन सेवाएं और विशेषज्ञ सहयोग प्रदान करेगा।
इसके अलावा, UAC ने विंग्स इंडिया 2026 अंतरराष्ट्रीय विमानन प्रदर्शनी के दौरान भारतीय कंपनी फ्लेमिंगो एयरोस्पेस को छह इल्यूशिन Il-114-300 विमानों की आपूर्ति के लिए भी समझौता किया है। इस सहयोग में असेंबली, संशोधन, रखरखाव, मरम्मत, ओवरहॉल और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाने का रोडमैप शामिल है।
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