हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास भारतीय टैंकरों पर फायरिंग की घटना के बाद भारत ने ईरानी राजदूत को तलब कर गहरी चिंता व्यक्त की थी। भारत के कड़े विरोध के बीच ईरान ने भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर भरोसा जताया है। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शनिवार(18 अप्रैल) को कहा कि दोनों देशों के रिश्ते 5000 साल पुराने इतिहास में जड़े हुए हैं और आगे भी मजबूत बने रहेंगे।
इलाही का यह बयान इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों, ‘सनमार हेराल्ड’ और ‘जग अर्नव’ पर फायरिंग की खबरों के बाद आया है। समुद्री ट्रैकिंग सेवाओं और विदेश मंत्रालय (MEA) के सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने से रोका गया और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
मीडिया से बातचीत में इलाही ने घटना की गंभीरता को कम करते हुए कहा कि उन्हें इस समुद्री टकराव की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “ईरान और भारत के बीच रिश्ते बहुत मज़बूत हैं और 5,000 साल के इतिहास से जुड़े हैं। हम शांति चाहते हैं, और हमें उम्मीद है कि हालात सुलझ जाएँगे। ईरानी लोग भारत से संस्कृति, सभ्यता और दर्शन से जुड़े हुए हैं। आगे भी दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।”
#WATCH | Hyderabad | On the shooting incident involving two Indian-flagged ships in the Strait of Hormuz, Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi, representative of Iran’s Supreme Leader in India, says, "The relationship between Iran and India is very strong and I don't know anything about… pic.twitter.com/KdsLQBkbmw
— ANI (@ANI) April 18, 2026
हालांकि, नई दिल्ली में स्थिति कहीं अधिक गंभीर नजर आई। शनिवार शाम विदेश सचिव ने ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि संबंधित जहाजों को पहले पारगमन की अनुमति दी गई थी, जिससे बाद में हुई फायरिंग की घटना और अधिक चिंताजनक बन गई है।
दौरान खाड़ी क्षेत्र में संघर्षविराम की स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है। 16 अप्रैल को ईरान ने जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुला घोषित किया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही ईरान द्वारा अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए फिर से कड़ा नियंत्रण लागू कर दिया।
बता दें जिस ‘सनमार हेराल्ड’ पर फायरिंग हुई उसमें लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था, वहीं ‘जग अर्नव’ भारत के लिए यूरिया लेकर आ रहा था। दोनों जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और चालक दल सुरक्षित है। हालांकि, इस घटना ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और सुरक्षित पारगमन की विश्वसनीयता को ठेस पहुँची है।
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