भारत ने वाणिज्य मंत्री के साथ कनाडा भेजा अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल, मुक्त व्यापार समझौते पर होगी बातचीत

पीयूष गोयल के नेतृत्व में 150 सदस्यीय डेलिगेशन कनाडा पहुंचा, 2030 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

भारत ने वाणिज्य मंत्री के साथ कनाडा भेजा अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल, मुक्त व्यापार समझौते पर होगी बातचीत

India sends its largest business delegation to Canada, accompanied by the Commerce Minister, to negotiate a free trade agreement.

भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल सोमवार (25 मई) को कनाडा पहुंचे। उनके नेतृत्व में 150 सदस्यीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी कनाडा गया है, जिसे अब तक का भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक डेलिगेशन माना जा रहा है।

तीन दिवसीय इस उच्चस्तरीय दौरे को भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को 2026 के अंत तक अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच यह आर्थिक पहल ऐसे समय हो रही है जब हाल के महीनों में द्विपक्षीय संबंधों में नई गर्मजोशी देखने को मिली है।

मार्च 2026 में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई कूटनीतिक नरमी ने व्यापार वार्ताओं को नया आधार दिया। इसी दौरान नए व्यापार ढांचे के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस भी आधिकारिक रूप से तय किए गए थे।

भारत के इस बड़े प्रतिनिधिमंडल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा, एयरोस्पेस, फार्मास्युटिकल्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। दरअसल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिका की अति-यथार्थवाद नीतिओं चलते भारत अपने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर के स्तर पर रहा। हालांकि दोनों देशों ने अब 2030 तक इस व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर यानी लगभग 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।

अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ओटावा और टोरंटो में कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे। उनकी कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिन्दर संधू और विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ वार्ता प्रस्तावित है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ भी उनकी शिष्टाचार मुलाकात तय है।

भारत का मुख्य लक्ष्य कनाडा के विशाल प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच मजबूत करना है, ताकि देश की ऊर्जा परिवर्तन रणनीति को दीर्घकालिक आधार मिल सके। कनाडा तेल, गैस, क्रिटिकल मिनरल्स और उन्नत खनन तकनीक के क्षेत्र में मजबूत स्थिति रखता है, जबकि भारत के पास विशाल कुशल कार्यबल और विनिर्माण क्षमता है।

पीयूष गोयल ने कहा, “कनाडा तेल, गैस, क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड माइनिंग में बेहद मजबूत है, जबकि भारत के पास अतुलनीय स्किल्ड वर्कफोर्स और विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। हम आने वाले वर्षों में भारत में काम कर रही कनाडाई कंपनियों की संख्या 600 से बढ़ाकर 1,000 से अधिक करना चाहते हैं।”

सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश भी इस दौरे का प्रमुख एजेंडा है। पीयूष गोयल कनाडा के बड़े मैपल 8 पेंशन फंड्स के प्रमुखों से भी मुलाकात करेंगे। भारत इन बहु-अरब डॉलर फंड्स से दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करना चाहता है, जिससे देश में हाईवे, ग्रीन एनर्जी ग्रिड और डिजिटल नेटवर्क जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति मिल सके। भारत सरकार को उम्मीद है कि यहरा न दौ केवल व्यापार समझौते को गति देगा, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

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