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Monday, May 25, 2026
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मुलुंड डंपिंग ग्राउंड पर जैविक उपचार अंतिम चरण में, वर्षों की देरी के बाद 60 एकड़ जमीन होगी पुनः प्राप्त

मुंबई नगर निगम ने 70 लाख टन पुराने कचरे में से 85 प्रतिशत का निस्तारण पूरा किया, डीजल संकट और कोविड के कारण परियोजना में आई थी रुकावट

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मुंबई के मुलुंड डंपिंग ग्राउंड पर चल रही जैविक उपचार परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, करीब 70 लाख टन पुराने कचरे में से लगभग 85 प्रतिशत का प्रसंस्करण पूरा कर लिया गया है और दिसंबर 2026 तक इस स्थल से लगभग 60 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त कर ली जाएगी।

करीब पांच वर्ष पहले शुरू हुई इस परियोजना को कई बार समय सीमा बढ़ानी पड़ी। अक्टूबर 2018 में बीएमसी ने 731 करोड़ रुपये की लागत से इस डंपिंग ग्राउंड को बायो-माइनिंग तकनीक के जरिए साफ करने का ठेका दिया था। हालांकि कोविड-19 महामारी, प्रशासनिक मंजूरियों में देरी और हालिया अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण काम प्रभावित होता रहा।

बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक फरवरी 2026 तक मुलुंड डंपिंग ग्राउंड पर 55 लाख टन से अधिक कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है। इसके लिए प्रतिदिन 10,000 से 12,000 टन कचरे के निस्तारण की क्षमता से काम किया गया।

हालांकि हाल ही में खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण डीजल की कमी ने परियोजना को नया झटका दिया। भारी मशीनों के संचालन में ईंधन संकट का असर पड़ा, जिससे बायो-माइनिंग और कचरा प्रसंस्करण की गति प्रभावित हुई।

एक अधिकारी ने कहा, “ठेकेदार को पहले ही चार बार समय विस्तार दिया जा चुका है। अब उसे शेष कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है, क्योंकि आगे किसी और विस्तार पर विचार नहीं किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि बाकी बचा 15 प्रतिशत काम आने वाले दिनों में पूरा हो जाएगा, जिसके बाद इस वर्ष लगभग 60 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त कर ली जाएगी।”

मुंबई में प्रतिदिन लगभग 7,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसमें से लगभग 90 प्रतिशत कचरे का प्रसंस्करण कांजुरमार्ग प्रोसेसिंग प्लांट में किया जाता है, जबकि करीब 10 प्रतिशत कचरा अब भी देवनार डंपिंग ग्राउंड में डाला जाता है।

24 हेक्टेयर में फैला मुलुंड डंपिंग ग्राउंड वर्ष 1968 से संचालित था और कभी यह मुंबई का दूसरा सबसे बड़ा लैंडफिल साइट माना जाता था। इसे आधिकारिक रूप से 2018 में बंद कर दिया गया था। इसके बाद पर्यावरण अनुकूल बायो-माइनिंग तकनीक के जरिए पुराने कचरे को हटाकर जमीन पुनः प्राप्त करने की योजना शुरू की गई।

अधिकारियों ने बताया कि मुंबई के दो बड़े पुराने डंपिंग स्थल मुलुंड और देवनार पर वर्तमान में जैविक उपचार कार्य चल रहा है। जहां मुलुंड परियोजना अंतिम चरण में है, वहीं बीएमसी ने देवनार डंपिंग ग्राउंड पर करीब 185 लाख टन कचरे के निस्तारण के लिए भी लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी कर दिया है।

नगर निगम का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल पर्यावरणीय दबाव कम होगा, बल्कि शहर में अतिरिक्त भूमि उपलब्ध होने से भविष्य की शहरी योजनाओं को भी फायदा मिलेगा।

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