भारत का पासपोर्ट एक बार फिर ग्लोबल रैंकिंग में गिर गया है। जुलाई 2026 के हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट अब 81वें नंबर पर पहुंच गया है और भारतीय नागरिक वीज़ा-फ़्री, वीज़ा-ऑन-अराइवल या ई-वीज़ा की सुविधा से 55 देशों की यात्रा कर सकते हैं। जून 2026 में भारत 80वें नंबर पर था, जबकि फरवरी में यह 75वें नंबर पर पहुंच गया था। हालांकि, एक साल के अंदर फिर से गिरावट ने भारत की ग्लोबल ट्रैवल फ़्रीडम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स को दुनिया की सबसे भरोसेमंद पासपोर्ट रैंकिंग में से एक माना जाता है। यह इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा के आधार पर तैयार किया जाता है। किसी देश के पासपोर्ट की मज़बूती इस बात से तय होती है कि उसके नागरिक बिना पहले से इजाज़त लिए कितने देशों में जा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में भारतीय पासपोर्ट की मज़बूती में उतार-चढ़ाव आया है। 2006 में भारत 71वें नंबर पर था। इसके बाद यह रैंकिंग में लगातार गिरता गया और 2021 में 91वें स्थान पर पहुंच गया। हाल के सालों में सुधार के बावजूद, इस साल जुलाई के अपडेट में भारत 81वें स्थान पर खिसक गया है।
इस बीच, सिंगापुर ने एक बार फिर दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट का खिताब बरकरार रखा है। सिंगापुर के नागरिकों को 192 देशों में वीजा-फ्री एक्सेस है। इसके बाद जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नंबर आता है। वहीं, अफगानिस्तान का पासपोर्ट सबसे कमजोर बताया गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, किसी देश के पासपोर्ट की मजबूती उसके इंटरनेशनल रिलेशन, फॉरेन पॉलिसी, बाइलेटरल एग्रीमेंट और ग्लोबल क्रेडिबिलिटी का आईना होती है। इसलिए, भले ही भारत की रैंकिंग गिरी हो, लेकिन अगर भविष्य में और देशों के साथ वीजा फैसिलिटेशन एग्रीमेंट साइन होते हैं तो भारतीय पासपोर्ट की ताकत फिर से बढ़ सकती है।
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