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अमेरिका का ‘यू वीज़ा’ पाने के लिए भारतीयों ने रचा डकैती का नाटक, 11 लोग गिरफ्तार

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अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीय नागरिकों पर वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी सरकारी वकीलों के अनुसार, इन लोगों ने ग्रीन कार्ड पाने के लिए सुविधा स्टोर्स में नकली सशस्त्र डकैती की घटनाएं करवाईं। बोस्टन, मैसाचुसेट्स के संघीय जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस गिरोह ने कई दुकानों में डकैती की घटनाएं इस तरह अंजाम दीं ताकि वहां काम करने वाले कर्मचारी खुद को अपराध का पीड़ित दिखा सकें, जो विशेष प्रकार के वीज़ा प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण शर्त होती है।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने जानबूझकर दुकानों में नकली डकैती की योजना बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुकान के क्लर्कस को इमिग्रेशन आवेदन में अपराध का पीड़ित दिखाने का मौका देना था। दरअसल, यह पूरी साजिश ‘यू वीज़ा’ हासिल करने के लिए रची गई थी। यह वीज़ा उन प्रवासियों को दिया जाता है जो किसी अपराध के शिकार हुए हों, मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेली हो और पुलिस जांच में मददगार साबित हुए हों। इस वीज़ा के जरिए प्रवासियों को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है और 5 से 10 वर्षों के भीतर ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) प्राप्त करने का रास्ता खुल जाता है।

इस मामले में वीज़ा धोखाधड़ी की साजिश के आरोप में जिन 11 लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें जितेंद्रकुमार पटेल (39), महेशकुमार पटेल (36), संजयकुमार पटेल (45), दीपिकाबेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिताबेन पटेल (43), रौनककुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40) शामिल हैं। ये सभी मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहायो जैसे अमेरिकी राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे। दीपिकाबेन पटेल को वेमाउथ, मैसाचुसेट्स में अवैध रूप से रहने के कारण भारत वापस भेज दिया गया है।

जितेंद्रकुमार, महेशकुमार, संजयकुमार, अमिताबेन, संगीताबेन और मितुल को मैसाचुसेट्स में गिरफ्तार किया गया और शुक्रवार को बोस्टन की संघीय अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। वहीं रमेशभाई, रौनककुमार, सोनल और मिंकेश को केंटकी, मिसौरी और ओहायो में गिरफ्तार किया गया है। उन्हें बाद में बोस्टन की संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम में डकैत सीसीटीवी कैमरों के सामने बंदूक या इसी तरह के हथियार दिखाकर कैशियर या दुकान मालिक को धमकाते थे और कैश बॉक्स से पैसे लेकर भाग जाते थे। डकैतों के भागने के लगभग पांच मिनट या उससे अधिक समय बाद ‘पीड़ित’ क्लर्क या मालिक जानबूझकर पुलिस को फोन कर घटना की शिकायत दर्ज कराते थे, ताकि मामला असली लगे।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित पीड़ितों ने इस योजना में शामिल होने के लिए पैसे दिए थे। बदले में उन्होंने अपनी दुकानों का इस्तेमाल इन नकली डकैतियों के लिए करने की अनुमति दी। डकैती को अंजाम देने वाले “डकैत” रामभाई और उनके फरार होने में मदद करने वाले ड्राइवर को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।

वीज़ा धोखाधड़ी की इस साजिश के आरोप में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 5 साल की जेल, 3 साल की निगरानी में रिहाई और 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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