भारत का चालू खाता अधिशेष अप्रैल में 4.7 अरब डॉलर रहा! 

अप्रैल में चालू खाता अधिशेष में रहने की वजह सर्विसेज निर्यात में बढ़ोतरी और विदेशों में काम कर रहे भारतीयों द्वारा अधिक प्रेषण भेजना था।

भारत का चालू खाता अधिशेष अप्रैल में 4.7 अरब डॉलर रहा! 

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भारत का चालू खाता अधिशेष अप्रैल में 4.7 अरब डॉलर रहा है, जबकि पिछले साल समान अवधि में देश का चालू खाता 4.8 अरब डॉलर के घाटे में था। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सोमवार को जारी डेटा में दी गई।

अप्रैल में चालू खाता अधिशेष में रहने की वजह सर्विसेज निर्यात में बढ़ोतरी और विदेशों में काम कर रहे भारतीयों द्वारा अधिक प्रेषण भेजना था।

डेटा के मुताबिक, देश ने अप्रैल में 37 अरब डॉलर की सर्विसेज का निर्यात किया है। वहीं, आयात 18.4 अरब डॉलर रहा है, जिससे सर्विसेज निर्यात अधिशेष 18.6 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है, जो कि पिछले साल अप्रैल में 15.9 अरब डॉलर था।

अप्रैल में प्रेषण 16 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल के समान अवधि के आंकड़े 9.4 अरब डॉलर से काफी अधिक है। शुद्ध आय घाटा कम होकर 1.9 अरब डॉलर रहा है, जो कि पहले 3 अरब डॉलर था।

अप्रैल 2026 में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़कर 7.4 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी महीने में 1.6 अरब डॉलर था। वहीं, देश में आने वाला कुल एफडीआई इनफ्लो 5 अरब डॉलर से दोगुने से भी अधिक बढ़कर 11.4 अरब डॉलर हो गया है।

हालांकि, इस महीने नेट फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (एफपीआई) में 8.7 अरब डॉलर की निकासी देखी गई, जबकि पिछले साल अप्रैल में यह 2.1 अरब डॉलर था। वहीं, बैंकिंग कैपिटल भी नकारात्मक हो गया, जो एक साल पहले 3.3 अरब डॉलर के इनफ्लो के मुकाबले इसमें 3.7 अरब डॉलर का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया।

आरबीआई के डेटा के अनुसार, भारत ने 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में 7.1 अरब या जीडीपी का 0.7 प्रतिशत का चालू खाता अधिशेष दर्ज किया है। हालांकि, 2025-26 की आखिरी तिमाही में एफपीआई का नेट आउटफ्लो 12 अरब डॉलर रहा है।

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