इज़रायल-अमेरिका बनाम ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही बंद कर दी है और केवल कुछ देशों को ही अपने जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। इसके चलते इस क्षेत्र की स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। मध्य पूर्व में ईरान की कार्रवाइयों की कई देशों ने कड़ी निंदा की है और इस जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले पर नाराज़गी जताई है। साथ ही सभी देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील की है।
यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेक गणराज्य, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया के नेताओं ने इस स्थिति पर संयुक्त बयान जारी किया है।
बयान में कहा गया है, “हम खाड़ी क्षेत्र में निहत्थे व्यापारिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों, तेल और गैस परियोजनाओं सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हैं। बढ़ते तनाव को लेकर हम गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं।” इसमें ईरान से व्यापारिक जहाजों के लिए मार्ग बाधित करने की धमकियां, समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमले सहित सभी आक्रामक गतिविधियां तुरंत बंद करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2917 का पालन करने की अपील की गई है।
बयान में आगे कहा गया कि नौवहन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूल सिद्धांत है, जिसमें समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन शामिल है। ईरान की इन गतिविधियों का असर पूरी दुनिया पर, खासकर कमजोर देशों पर पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन में बाधा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। साथ ही तेल और गैस परियोजनाओं समेत नागरिक ढांचे पर हमले तुरंत रोकने की मांग की गई है।
सभी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन किया है। बयान में कहा गया, “हम इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयासों में सहयोग देने को तैयार हैं और तैयार देशों के प्रयासों का स्वागत करते हैं।” इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा सामरिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने के फैसले का भी स्वागत किया गया है। ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए अन्य कदम भी उठाए जाएंगे, जिनमें उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाना शामिल है।
इसके अलावा, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से प्रभावित देशों को सहायता देने की बात भी कही गई है। बयान में अंत में कहा गया, “समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता का लाभ सभी देशों को होता है। सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।”
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