पश्चिम एशिया में तेज होते सैन्य टकराव के बीच ईरान ने साइप्रस की दिशा में दो मिसाइलें दागीं, जहां यूनाइटेड किंगडम के महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे स्थित हैं। ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हैली ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ईरान की अंधाधुंध और चारों ओर कार्रवाई का संकेत है। मीडिया से बातचीत में हीली ने कहा, “हमारी जानकारी के अनुसार साइप्रस की दिशा में दो मिसाइलें दागी गईं। हमें पूरा भरोसा है कि वे सीधे हमारे ठिकानों को निशाना बनाकर नहीं दागी गई थीं।” हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम क्षेत्र में तेजी से बढ़ते वास्तविक खतरे को दर्शाता है।
साइप्रस में स्थित ब्रिटेन का प्रमुख एयरबेस आरएएफ अक्रोटिरी और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान हाई अलर्ट पर हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया और द्वीप पर किसी तरह का नुकसान या हताहत नहीं हुआ। फिर भी मिसाइलों की दिशा को देखते हुए ब्रिटिश सैन्य कर्मियों और संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर तत्काल चिंता पैदा हुई।
ब्रिटेन के विमान साइप्रस और कतर स्थित ठिकानों से संचालित हो रहे हैं, क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा के लिए ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करने की समन्वित कार्रवाई में शामिल हैं।
ईरान ने खाड़ी और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय के आसपास विस्फोटों की खबरें आईं। कुछ हमले उन क्षेत्रों के निकट गिरे जहां लगभग 300 ब्रिटिश सैन्यकर्मी तैनात हैं, हालांकि किसी ब्रिटिश हताहत की पुष्टि नहीं हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुबई के कुछ होटलों को भी मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया, जहां अमेरिकी सैन्य कर्मी ठहरे हुए थे।
रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा, “यह ऐसा शासन है जो अन्य देशों को परेशान करता है और इसे कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” उन्होंने ईरान से मिसाइल हमले रोकने, अंधाधुंध कार्रवाई से पीछे हटने और अपने हथियार कार्यक्रम को त्यागने का आह्वान किया है।
फिलहाल साइप्रस में ब्रिटिश बल उच्च सतर्कता पर बने हुए हैं। RAF संपत्तियां रक्षात्मक गश्त जारी रखे हुए हैं ताकि द्वीप और क्षेत्रीय साझेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक साइप्रस की ओर किसी और मिसाइल प्रक्षेपण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे क्षेत्र में तनाव बरकरार है।
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