ईरान के परमाणु स्थलों पर बढ़ते खतरे के बीच अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने देश का दौरा किया। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने IAEA से अपने देश की ‘शांतिपूर्ण परमाणु फैसिलिटी’ पर मंडरा रहे संभावित खतरों को लेकर गुहार लगाई है। उन्होंने IAEA से इस खतरे को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
अराघची ने यह बयान मंगलवार (1 अप्रैल)को ग्रॉसी के साथ टेलीफोनिक वार्ता के दौरान दिया। उन्होंने इस वार्ता में अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दी जा रही धमकियों पर चिंता जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि यदि ईरान वाशिंगटन के साथ परमाणु समझौते को लेकर सहमति नहीं बनाता, तो अमेरिका उसके परमाणु ठिकानों पर हमला कर सकता है।
ईरान ने IAEA के साथ सहयोग की अपनी नीति को दोहराते हुए कहा कि जब तक उसके खिलाफ खतरों की आशंका बनी रहती है, वह अपने परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। अराघची ने IAEA प्रमुख को ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम और कूटनीतिक प्रयासों की ताजा स्थिति की जानकारी दी।
ग्रॉसी ने कहा कि वह मौजूदा विवादों को हल करने के लिए अन्य पक्षों के साथ चर्चा करेंगे और बेहतर माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने ईरान का दौरा करने की इच्छा जताई, जिस पर ईरान ने सहमति व्यक्त की।
इस बीच, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो उसे “ऐसे हमले का सामना करना पड़ेगा, जैसा उसने पहले कभी नहीं देखा।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है, हालांकि इस पर ईरान ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ट्रंप की यह धमकी उस कथित पत्र के बाद आई है, जिसे उन्होंने मार्च की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात के माध्यम से ईरानी नेताओं को भेजा था। इस पत्र में ईरान को परमाणु मुद्दे पर सीधे बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे तेहरान ने ठुकरा दिया। हालांकि, उसने अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया।
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