विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (23 अगस्त)को साफ शब्दों में कहा कि भारत अपनी व्यापारिक वार्ताओं में कुछ रेड लाइन्स से पीछे नहीं हटेगा और किसानों व छोटे उत्पादकों के हितों से किसी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। वह इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोल रहे थे, जहाँ उन्होंने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर भी खुलकर टिप्पणी की।
जयशंकर ने कहा, “हमारी कुछ रेड लाइन्स हैं। ये रेड लाइन्स मुख्य रूप से हमारे किसानों और कुछ हद तक छोटे उत्पादकों के हितों से जुड़ी हैं। सरकार की प्रतिबद्धता है कि हम उनके हितों की रक्षा करेंगे। यह कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर हम समझौता कर सकें।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में भारतीय सामानों पर टैरिफ दोगुना कर 50% तक बढ़ाने और रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25% शुल्क लगाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आई है। इस पर जयशंकर ने कहा कि व्यापार अब भारत-अमेरिका संबंधों में सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने कहा, “हमने इससे पहले कोई ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा जिसने विदेश नीति इतनी खुलकर और सार्वजनिक रूप से चलाई हो। यह सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, पूरी दुनिया इस बदलाव का सामना कर रही है।”
#WATCH | Delhi: At The Economic Times World Leaders Forum 2025, EAM Dr S Jaishankar speaks on US President Donald Trump, he says, "We've not had a US President who's conducted foreign policy as publicly as the current one. That itself is a departure that's not limited to India…… pic.twitter.com/vo0qbQDwgv
— ANI (@ANI) August 23, 2025
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भारत पर यह आरोप लगाया था कि वह रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे यूरोप और अन्य जगहों पर महंगे दामों पर बेचकर मुनाफाखोरी कर रहा है। इस पर जयशंकर ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, “यह मज़ेदार है कि एक प्रॉ-बिज़नेस अमेरिकी प्रशासन के लोग दूसरों पर बिज़नेस करने का आरोप लगाएँ। अगर आपको भारत से तेल या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने में दिक्कत है, तो मत खरीदिए। कोई आपको मजबूर नहीं करता। लेकिन सच यह है कि यूरोप भी खरीदता है, अमेरिका भी खरीदता है। पसंद नहीं है तो मत खरीदिए।”
जयशंकर ने उन विश्लेषणों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया कि वाशिंगटन के साथ मतभेद बढ़ने पर भारत और चीन के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह एक गलत विश्लेषण होगा कि हर चीज़ को जोड़कर देखा जाए और किसी विशेष परिस्थिति को सामान्यीकृत किया जाए।”
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