जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। देश के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके की रिपोर्ट के मुताबिक, इशिबा का यह फैसला सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के भीतर बढ़ते विभाजन और असंतोष को रोकने की कोशिश है। गौरतलब है कि जुलाई में हुए चुनाव में एलडीपी नेतृत्व वाले गठबंधन को करारा झटका लगा था। यह गठबंधन उच्च सदन की 248 सीटों में बहुमत हासिल करने में विफल रहा, जिससे सरकार की स्थिरता पर गहरा संकट मंडराने लगा।
68 वर्षीय शिगेरु इशिबा ने अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री पद संभाला था, लेकिन एक साल पूरा होने से पहले ही उन्हें पद छोड़ना पड़ रहा है। चुनावी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर खासतौर पर दक्षिणपंथी धड़े से उनका विरोध तेज हो गया था। कई नेताओं का मानना था कि खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को लेनी चाहिए।
पार्टी के अंदर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। सोमवार को एलडीपी की बैठक में यह तय होना था कि पार्टी नए नेतृत्व के लिए आंतरिक चुनाव कराए या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर नेतृत्व परिवर्तन का प्रस्ताव मंजूर हो जाता, तो यह सीधे तौर पर इशिबा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तरह होता। ऐसे हालात से बचने के लिए इशिबा ने खुद इस्तीफा देने का रास्ता चुना।
एफपी की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार रात जापान के कृषि मंत्री और एक पूर्व प्रधानमंत्री ने इशिबा से मुलाकात कर स्वेच्छा से पद छोड़ने की सलाह दी थी। वहीं, पिछले हफ्ते ही पार्टी के उपनेता हिरोशी मोरियामा सहित एलडीपी के चार वरिष्ठ नेताओं ने भी इस्तीफे की पेशकश कर माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया था।
इशिबा की सरकार ने हाल ही में अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौता अंतिम रूप दिया था, जिसे उनकी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था। लेकिन घरेलू राजनीति में पार्टी की टूटन और चुनावी हार ने उनकी स्थिति को कमजोर कर दिया। अब सभी की नजरें एलडीपी की बैठक पर हैं, जहां यह तय होगा कि जापान को अगला प्रधानमंत्री कौन मिलेगा।
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