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Monday, May 18, 2026
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मानसिक स्वास्थ्य कलंक नहीं, जानें इससे जुड़े सात मिथक और सच!

ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों को तोड़ना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ कलंक कम होगा बल्कि जरूरत पड़ने पर लोग बिना झिझक मदद भी ले सकेंगे।

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मानसिक स्वास्थ्य आज भी हमारे समाज में सबसे ज्यादा कलंकित विषयों में से एक है। जानकारी के अभाव में लोग इसे कमजोरी समझते हैं या फिर आमतौर पर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों को तोड़ना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ कलंक कम होगा बल्कि जरूरत पड़ने पर लोग बिना झिझक मदद भी ले सकेंगे।

समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई गलत धारणाएं फैली हुई हैं, खासकर किशोरों और युवाओं के बीच। इन गलतफहमियों को दूर करने के लिए यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) ने 7 आम मिथकों को सामने रखा है और उनके साथ सच भी बताया है।

मिथक है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या उसे ही होती है जिसकी बुद्धि कमजोर है। इसका सच है मानसिक बीमारी किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, चाहे उसकी बुद्धिमत्ता, सामाजिक स्थिति या आर्थिक स्तर कुछ भी हो। यह शारीरिक बीमारी की तरह है और किसी की समझदारी पर सवाल नहीं उठाती।

दूसरा मिथक है कि मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान तभी रखना चाहिए जब समस्या हो जाए। यह गलत है, इसे लेकर सच है कि हर व्यक्ति को अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे हम शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। स्वस्थ आदतें अपनाकर मानसिक रूप से भी सेहतमंद रहा जा सकता है।

तीसरा मिथक है कि किशोरों में खराब मानसिक स्वास्थ्य कोई बड़ी समस्या नहीं है, यह सिर्फ हार्मोनल बदलाव है। सच है कि किशोरों में मूड स्विंग्स सामान्य हो सकते हैं, लेकिन दुनिया भर में लगभग 14 प्रतिशत किशोर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। 10 से 19 साल के बीच आत्महत्या मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। मानसिक स्वास्थ्य की आधी से ज्यादा समस्याएं 14 साल की उम्र तक शुरू हो जाती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर मिथक यह भी है कि इनसे बचाव नहीं किया जा सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि कई प्रभावी तरीके हैं, जिनसे हम खुद को और अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं। मजबूत परिवारिक रिश्ते, अच्छा स्कूली माहौल, भावनात्मक कौशल का विकास और नियमित दिनचर्या बचाव करती है।

पांचवां मिथक है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या होना कमजोरी की निशानी है। सच यह है कि मानसिक समस्या का कमजोर इच्छाशक्ति या व्यक्तिगत कमजोरी से कोई संबंध नहीं है। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी ताकत और हिम्मत का संकेत है।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर मिथक यह भी है कि अच्छे ग्रेड वाले और लोकप्रिय किशोरों को मानसिक समस्या नहीं हो सकती। सच यह है कि डिप्रेशन और एंग्जायटी किसी को भी हो सकती है। ऊपर से अच्छी जिंदगी दिखने के बावजूद अंदर से व्यक्ति दबाव, चिंता या डिप्रेशन में हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक मिथक यह भी है कि खराब परवरिश की वजह से ही किशोरों में मानसिक समस्याएं होती हैं। सच है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कई कारणों से हो सकती हैं- यह गरीबी, हिंसा, बेरोजगारी, पारिवारिक चुनौतियां जैसी वजहों से भी हो सकती हैं।

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