अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से ठीक पहले ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि लेबनान में युद्धविराम के बिना वह किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा। इस बयान से इस्लामाबाद में होने वाली अहम वार्ता पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
ईरान ने साथ ही उन खबरों को भी खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उसका प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है। ईरान की सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, एक सूत्र ने कहा, “कुछ मीडिया आउटलेट्स का यह दावा कि ईरान का एक बातचीत करने वाला डेलीगेशन U.S. अधिकारियों से बातचीत करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में पहुंचा है, पूरी तरह से झूठ है।”
‘लेबनान में सीजफायर तक कोई बातचीत नहीं’
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लेबनान में इज़राइल के हमले बंद नहीं होते, तब तक अमेरिका के साथ कोई वार्ता संभव नहीं है। सूत्र के हवाले से कहा गया,”जब तक लेबनान में सीज़फ़ायर नहीं हो जाता, ईरान का इस्लामाबाद में अमेरिकी पक्ष के साथ शांति बातचीत में हिस्सा लेने का कोई प्लान नहीं है।” ईरान ने यह भी कहा कि बातचीत तभी शुरू होगी जब अमेरिका, लेबनान में सीजफायर को लेकर अपने वादों को पूरा करेगा और इज़राइल हमले रोकेगा।
दौरान लेबनान में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। बुधवार (8 अप्रैल) को लेबनान में इज़राइल के हमलों में कम से कम 182 लोगों की मौत हो गई, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। इज़राइल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं, जो ईरान समर्थित संगठन माना जाता है। इसी के जवाब में ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने का कदम उठाया, जिससे पहले से ही नाजुक युद्धविराम पर संकट गहरा गया है।
हॉर्मुज़ बंद कर ईरान का दबाव
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को इज़राइल के हमलों के जवाब में बंद किया गया है। ईरान ने अमेरिका को दिए अपने 10 सूत्रीय प्रस्ताव में भी लेबनान में युद्ध समाप्त करने की शर्त रखी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि लेबनान में युद्ध खत्म करना ही सीजफायर समझौते का हिस्सा है।
हालांकि, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि लेबनान सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है। इस बीच, इज़राइल ने दावा किया है कि उसने हिजबुल्लाह नेता नईम कासेम के करीबी सहयोगी अली यूसुफ हर्षी को मार गिराया है।
तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया अब गंभीर संकट में फंसती दिख रही है। ईरान के सख्त रुख और इज़राइल के जारी हमलों के चलते इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता के सफल होने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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