हाल ही में, अमेरिकन गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल एसोसिएशन ने कुछ नई गाइडलाइंस जारी की हैं जिनमें बताया गया है कि हमारी खाने-पीने और बाथरूम से जुड़ी आदतें सीधे तौर पर पाचन तंत्र को प्रभावित करती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर पेट रोज सही तरीके से साफ होता रहे, तो हम पाचन संबंधी कई समस्याओं से बच सकते हैं।
हमारे पाचन को ठीक रखने में फाइबर बहुत अहम भूमिका निभाता है। यह मल को नरम बनाता है और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है। लेकिन सच यह है कि ज्यादातर लोग रोज़ जितना फाइबर लेना चाहिए, उतना नहीं ले पाते। आजकल लोगों का झुकाव ‘हाई प्रोटीन डाइट’ की ओर ज्यादा हो गया है। वजन घटाने या फिट रहने के चक्कर में लोग प्रोटीन, खासकर मांस ज्यादा खाने लगे हैं, जिसमें बिल्कुल भी फाइबर नहीं होता है।
डॉक्टर साफ़ कहते हैं कि समाधान बहुत मुश्किल नहीं है। बस अपनी प्लेट में संतुलन लाना होगा, यानी दालें और बीन्स, साबुत अनाज (जैसे दलिया, ओट्स), ताजे फल, हरी सब्जियां, बीज और मेवे। क्योंकि ये सभी चीजें फाइबर से भरपूर होती हैं और पाचन को बेहतर बनाए रखती हैं। अगर ये रोज के खाने में शामिल हों, तो कब्ज की समस्या काफी कम हो सकती है।
दिलचस्प तथ्य जीवनशैली से जुड़ा हुआ यह भी है कि सिर्फ खाना ही नहीं, हमारी बाथरूम से जुड़ी आदतें भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। आजकल एक आम आदत बन गई है- टॉयलेट में फोन लेकर बैठना। लोग वहां बैठकर सोशल मीडिया देखते रहते हैं, मैसेज पढ़ते हैं और कई बार जरूरत से ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं।
बवासीर आमतौर पर कब्ज से जुड़ा होता है। यह भले ही एक आम समस्या की तरह लगे, लेकिन अगर ये समस्या लंबे समय तक बनी रहे या मल के साथ खून दिखे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार लोग इसे सिर्फ बवासीर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे कोलन कैंसर। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
अंत में पूरी बात का सार यही है कि हमारी छोटी-छोटी रोजमर्रा की आदतें ही हमारी सेहत तय करती हैं। यह कोई जटिल इलाज नहीं, बल्कि जागरूकता और नियमितता का मामला है और अच्छी बात यह है कि इसे हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में आसानी से शामिल कर सकता है।
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