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पाकिस्तान की ‘दोस्ती’ में छुपा धोखा: जयशंकर ने याद दिलाया अमेरिका को पुराना दर्द!

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अमेरिका और पाकिस्तान एक बार फिर से करीब आते दिख रहे हैं। लेकिन सवाल यही उठता है कि क्या वॉशिंगटन अपने ही घाव भूल रहा है? इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जब सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान के साथ अपने इतिहास को नज़रअंदाज़ कर रहा है। जयशंकर ने अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया जिसे अमेरिकी नेवी सील ने 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में ढेर किया था।

दरअसल, 9/11 आतंकी हमले से लेकर अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की हत्या तक, हर बार पाकिस्तान ने अमेरिका को ऐसा दर्द दिया है जिसे भुलाना आसान नहीं। इसके बावजूद दोनों देशों के रिश्ते अक्सर मौकापरस्ती पर टिके रहे हैं।

10 मौके जब पाकिस्तान ने अमेरिका को दिया जख्म

1. 9/11 हमला (2001):
11 सितंबर 2001 को दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ। अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार विमानों को हाइजैक किया। दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए, एक पेंटागन से और चौथा पेन्सिलवेनिया में गिरा। करीब 3,000 लोगों की जान चली गई। मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा था। अमेरिका ने सालों तक अफगानिस्तान की पहाड़ियों में उसे खोजा, लेकिन अंत में वह पाकिस्तान के एक मिलिट्री ज़ोन में मिला। अमेरिकी अधिकारियों का हमेशा से मानना रहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को उसकी मौजूदगी की जानकारी थी, मगर उसने दुनिया से छिपाया।

2. टाइम्स स्क्वायर कार हमला (2010):
1 मई 2010 को न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक फैसल शहजाद ने कार बम धमाका करने की कोशिश की। यह हमला नाकाम रहा, लेकिन जांच में सामने आया कि शहजाद को पाकिस्तान के वजीरिस्तान इलाके में तहरीक-ए-तालिबान (TTP) ने ट्रेनिंग दी थी। इस घटना से साफ हुआ कि पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठन केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक खतरा हैं।

3. 1993 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ब्लास्ट:
26 फरवरी 1993 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की पार्किंग में ट्रक बम विस्फोट हुआ। इस हमले में 6 लोगों की मौत और 1,000 से ज्यादा लोग घायल हुए। हमले का साजिशकर्ता रमजी यूसुफ पाकिस्तानी मूल का निकला, जिसने पाकिस्तान में ही बम बनाने और आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग ली थी। उसका लक्ष्य टावर को गिराना था ताकि हजारों लोग मारे जाएं। यह अमेरिका पर अल-कायदा से जुड़े पाकिस्तानी नेटवर्क का पहला बड़ा हमला था।

4. यूएस कांसुलेट हमला (2011):
20 मई 2011 को पेशावर स्थित अमेरिकी कांसुलेट की गाड़ी पर आत्मघाती हमलावर ने हमला किया। हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत और कई लोग घायल हुए। इसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान ने ली। यह वही संगठन था जो पाकिस्तान की धरती से ही अमेरिकी हितों पर लगातार हमले करता रहा।

5. लादेन की मौत का बदला (2011):
ओसामा बिन लादेन की एबटाबाद में मौत के कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान के शबकदर इलाके में दो आत्मघाती धमाकों ने तबाही मचाई। इसमें 80 अर्धसैनिक जवान मारे गए। हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान ने ली और इसे अमेरिका से बदला बताया। संदेश साफ था—अमेरिका की कार्रवाई का खामियाजा वह और उसके सहयोगी उठाएंगे।

6. डैनियल पर्ल की हत्या (2002):
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डैनियल पर्ल को कराची से किडनैप कर लिया गया। बाद में उनका सिर कलम कर हत्या कर दी गई। इस साजिश का मास्टरमाइंड उमर शेख था, जो ब्रिटिश-पाकिस्तानी आतंकी था और जिसके अल-कायदा व जैश-ए-मोहम्मद से रिश्ते थे। पाकिस्तान की अदालत ने उसे दोषी ठहराया, लेकिन 2020 में उसकी सजा पलट दी गई, जिससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में आलोचना हुई।

7. अल-कायदा का ठिकाना (2000s):
9/11 के बाद अल-कायदा ने पाकिस्तान के संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों (FATA) में अपने ठिकाने बना लिए। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स ने बार-बार चेतावनी दी कि यहीं से अल-कायदा अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में हमलों की योजना बना रहा है। पाकिस्तान की निष्क्रियता और आईएसआई का मौन समर्थन इस पूरे नेटवर्क को ताकत देता रहा।

8. मुंबई हमला (2008):
26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा ने मुंबई पर हमला किया। तीन दिनों तक चली इस आतंकी वारदात में 170 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने खुद स्वीकार किया कि हमलावर पाकिस्तान से आए थे और वहीं उन्हें ट्रेनिंग मिली थी। अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद पर इनाम रखा, लेकिन वह पाकिस्तान में खुलेआम घूमता रहा।

9. क्वेटा और मिंगोरा धमाके (2013):
10 जनवरी 2013 को पाकिस्तान के क्वेटा और मिंगोरा में सिलसिलेवार बम धमाकों ने 115 लोगों की जान ले ली। इन हमलों की जिम्मेदारी लश्कर-ए-झंगवी और यूनाइटेड बलूच आर्मी ने ली। दोनों संगठन पाकिस्तान में सक्रिय रहे हैं और अमेरिकी हितों के खिलाफ उनकी गतिविधियों का लंबा इतिहास रहा है।

10. ISIS की साजिश (2024):
2024 में एक पाकिस्तानी नागरिक मुहम्मद शहजेब, जो कनाडा में रह रहा था, न्यूयॉर्क में बड़े आतंकी हमले की योजना बनाते पकड़ा गया। उसने सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आईएसआईएस का प्रचार किया और हमला करने की तैयारी कर रहा था। यह साजिश नाकाम रही, लेकिन एक बार फिर स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तानी नागरिक वैश्विक आतंकी नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

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