दुकानदारों का कहना है कि प्रधानमंत्री के इस कदम से बिहार के पारंपरिक उत्पादों की पहचान देश-विदेश में बढ़ेगी। इससे स्थानीय मिठाई और खाद्य उत्पादों की मांग में इजाफा हो सकता है, जिसका सीधा लाभ छोटे दुकानदारों, महिला स्वयं सहायता समूहों और कुटीर उद्योगों को मिलेगा।
ठेकुआ विक्रेता अनिल कुमार ठाकुर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “यह बहुत बड़ी अचीवमेंट है। हमारा बिहार का ठेकुआ वहां सर्व किया गया, यह बहुत अच्छी बात है। ठेकुआ को बहुत बड़ा महत्व मिलेगा। जैसे विदेश के लोग उसको पहचानेंगे, वैसे ही हम लोगों की भी पहचान बनेगी।
अनिल ने कहा कि इस ठेकुआ का छठ पर्व पर विशेष महत्व है, लोग प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं। हालांकि, सामान्य दिनों में भी ठेकुआ की बिक्री होती है। यह बहुत अच्छी और सराहनीय पहल है। हमारे देश और प्रदेश की मिठाई की पहचान विदेशों में भी होगी।
ठेकुआ खरीदार शंकर शाह ने कहा, “फायदा होगा, हम लोगों का धंधा चलेगा, देश-विदेश में भी यहां से एक्सपोर्ट होगा। ठेकुआ भेजेंगे हम लोग। जैसे ब्रिटानिया बिस्कुट बेचता है, हम लोग ठेकुआ बेचेंगे। अच्छी बात है। मुझे पटना स्टेशन से पता चला कि इस दुकान पर शादी-विवाह में देने के लिए मिठाई मिलती है।
ग्राहकों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा ठेकुआ को विदेश में भेंट किया जाना बिहार की संस्कृति और स्थानीय उत्पादों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे आने वाले समय में राज्य के पारंपरिक उत्पादों की मांग और लोकप्रियता दोनों बढ़ सकती हैं।
ग्राहक आईआईटी प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा, “अगर देखा जाए कि जो गांव से ग्लोबल तक एक नारा है, विकसित भारत का जो नारा है, अपने देश का भी जो अमृत काल चल रहा है, तो उसमें यह अवधारणा पहले से थी कि जो मार्केटिंग में लोग पारंगत थे, तो वो अपने सामान को उस हिसाब से प्रोड्यूस करते थे और प्रोडक्ट को बेचते थे, चाहे वो नेशनल लेवल पर जितने भी सामान हों, लेकिन लोकल, जो हमारे जितने भी सामान थे, जो वर्षों से, हजारों वर्षों से परंपरा चली आ रही थी, तो वो विलुप्त होती जा रही थी।
उन्होंने कहा कि उत्पादों के संरक्षण के लिए पीएम मोदी ने लोकल फॉर वोकल की शुरुआत की है। स्थानीय उत्पादों में अभी गुणवत्ता है, अगर इसका प्रचार हम नहीं करेंगे तो उत्पाद की पहचान कैसे होगी। पीएम मोदी के द्वारा ठेकुआ देने पर उत्पाद का महत्व वैश्विक स्तर पर पहुंच जाता है।
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