डॉ. उमा कुमार ने कहा कि आम तौर पर हमने रूमेटॉइड आर्थराइटिस और फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों पर योग का असर अलग-अलग पहलुओं में देखा है। हमने उन मरीजों पर दवाओं का असर भी देखा है, जो योग भी कर रहे थे। हमने पाया कि मरीजों में दवा का असर हुआ, मरीज बहुत खुश थे, उसे अच्छी नींद आती थी, उसमें नकारात्मकता कम थी, उसके जीवन की गुणवत्ता अच्छी थी, और उसे दर्द से काफी राहत मिली थी।
गठिया के मरीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मैं कहूंगी कि यह बहुत जरूरी है, क्योंकि योग हमें वे सभी चीजें देता है, जिनके बारे में हमने अभी बात की है। और किसी भी व्यक्ति के लिए अच्छी जिंदगी जीना बहुत जरूरी है, चाहे आप किसी ग्रुप के साथ यात्रा कर रहे हों या किसी और के साथ। तो योग इसमें बहुत बड़ा योगदान देता है।
दिल्ली एम्स की एक अन्य डॉक्टर ने गठिया के मरीजों में योग के लाभ के बारे में बताया कि योग से फ्लेक्सिबिलिटी बहुत बेहतर होती है, जिसे हमने गोनियोमीटर से देखा है। हम रिकॉर्ड करते हैं कि हम कितने जोड़ों को हिला पा रहे हैं। तो हमने देखा कि योग के बाद इन मरीजों में सूजन (इन्फ्लेमेशन) भी कम हुई और रेंज ऑफ मोशन यानी वे अपने जोड़ों को कितना हिला पा रहे हैं, उसमें भी सुधार हुआ।
जोड़ों के दर्द को लेकर उन्होंने कहा कि दिल्ली एम्स की रिसर्च में देखा गया है कि अगर हम सुपरवाइज्ड योग (किसी की देखरेख में योग) करते हैं तो जोड़ों के दर्द में फायदा होता है, ऐसा नहीं है कि हम कोई भी योग एक्सरसाइज कर लें। अगर हम सुपरवाइज्ड तरीके से एक्सरसाइज करते हैं तो हमें बेहतर राहत मिलती है। निश्चित रूप से काफी सुधार होता है। जोड़ों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।
उन्होंने कहा कि पीठ दर्द वाले मरीजों के लिए भुजंगासन और शलभासन की सलाह दी जाती है, साथ ही हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, बॉडी रोटेशन और गर्दन के लिए ढीला करने वाली एक्सरसाइज भी कराई जाती हैं। इन एक्सरसाइज से मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर की गतिशीलता (मोबिलिटी) बेहतर होती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार योग को लेकर जो पहल कर रही है कि वह बहुत अच्छी पहल है, जिसकी शुरुआत हमारे ही देश में हुई थी, इसलिए हमें यह एक्सरसाइज करनी चाहिए और हर किसी को इसे करना चाहिए। हमें अपने खाली समय में जितना हो सके योग करना चाहिए।
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