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Wednesday, May 20, 2026
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आरजी कर रेप-मर्डर केस कलकत्ता हाईकोर्ट की नई बेंच को ट्रांसफर!

मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने कहा कि पीड़िता के परिवार की अपराध स्थल पर जाने की याचिका समेत सभी संबंधित मामलों की सुनवाई अब नई खंडपीठ करेगी।

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेप और हत्या मामले की सुनवाई अब कलकत्ता हाईकोर्ट की नई खंडपीठ करेगी। मुख्य न्यायाधीश सजॉय पॉल ने शनिवार को आदेश दिया कि मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तिर्थंकर घोष की डिवीजन बेंच में होगी।

पीड़िता के परिवार ने 9 अगस्त 2024 की घटना की सीबीआई जांच को लेकर हाई कोर्ट में नई याचिका दायर की है। परिवार के वकील ने घटना स्थल का दौरा करने की अनुमति भी मांगी है। दूसरी ओर, जांच एजेंसी सीबीआई ने दोषी संजय रॉय को सुनाई गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ मौत की सजा की मांग करते हुए आवेदन दाखिल किया है। वहीं, संजय रॉय ने खुद को निर्दोष बताते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की है।

मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने कहा कि पीड़िता के परिवार की अपराध स्थल पर जाने की याचिका समेत सभी संबंधित मामलों की सुनवाई अब नई खंडपीठ करेगी।

गौरतलब है कि यह मामला पहले कलकत्ता हाईकोर्ट की अलग-अलग बेंचों के पास था। 12 मई को न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था कि “इस महत्वपूर्ण मामले की जल्द सुनवाई होनी चाहिए।” इसके बाद नई बेंच गठित की गई।

पीड़िता के परिवार ने उस स्थान का दोबारा दौरा करने की अनुमति मांगी थी, जहां महिला डॉक्टर का शव मिला था। न्यायमूर्ति मंथा की बेंच ने टिप्पणी की थी कि सीबीआई को इस पर कोई आपत्ति नहीं है; फिर राज्य सरकार क्यों विरोध कर रही है, जबकि वह मामले में पक्षकार भी नहीं है?

बेंच ने यह भी कहा था कि संजय रॉय के बरी किए जाने की अपील और सीबीआई की फांसी की मांग वाली याचिका पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता के परिवार के वकील सोमवार को नई बेंच के समक्ष मामले की जल्द सुनवाई की मांग कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। अगले दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

18 जनवरी 2025 को सियालदह अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए संजय रॉय को दोषी करार दिया था। 20 जनवरी को न्यायाधीश अनिरबान दास ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हालांकि, निचली अदालत के फैसले से पहले ही पीड़िता के माता-पिता ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस समय न्यायमूर्ति तिर्थंकर घोष इस मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते थे, क्योंकि आरजी कर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित था।

इसके बाद पीड़िता के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया। उस दौरान तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया था कि एक ही याचिका पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों में सुनवाई क्यों हो। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में कहा था कि मामले की सुनवाई हाई कोर्ट ही करेगा। इसके बाद से यह मामला हाई कोर्ट में लंबित है।

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