अभी, राज्य के मार्केट में चीनी के दामों में बड़ी उछाल की तस्वीर देखी जा रही है। चीनी के इस बढ़ते दाम से कंज्यूमर्स पर भारी असर पड़ रहा है। अभी, चीनी के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
चीनी 7 हजार 500 प्रति क्विंटल हो गई है। जबकि वाशिम जिले में रिटेल मार्केट में चीनी के दाम 80 रुपये तक पहुंच गए हैं। इससे कंज्यूमर्स पर बड़ा फाइनेंशियल असर पड़ रहा है। इस बीच, आने वाले दिनों में चीनी के दामों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इसलिए, चीनी के बढ़ते दाम का सीधा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ने की संभावना है।
हिंगोली में चीनी के दाम 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। चीनी के दामों में इस भारी बढ़ोतरी का असर अब मिठाई के बिजनेस के गणित पर सीधा पड़ रहा है। क्योंकि मिठाई बनाने में चीनी सबसे जरूरी और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज है। इस वजह से चीनी महंगी हो गई है और मिठाई बेचने वालों का प्रोडक्शन कॉस्ट भी बढ़ गया है। इसका असर मिठाई के दामों पर पड़ने की संभावना है।
राज्य के किस जिले में चीनी का भाव क्या है?
मुंबई – चीनी की कीमत कुछ जगहों पर 60 रुपये, कुछ जगहों पर 65 रुपये बढ़ी
सांगली- 80 रुपये प्रति किलो
बुलढाणा- 80 रुपये प्रति किलो
वाशिम- 80 रुपये प्रति किलो
कोल्हापुर- 75 रुपये प्रति किलो
नासिक- 75 रुपये प्रति किलो
पुणे- 72 रुपये प्रति किलो
परभणी- 70 रुपये प्रति किलो
सतारा- 70 रुपये प्रति किलो
पालघर- 70 रुपये प्रति किलो
भंडारा- 70 रुपये प्रति किलो
जलगांव- 68 रुपये प्रति किलो
अकोला- 65 रुपये प्रति किलो
रत्नागिरी- 62 रुपये प्रति किलो
चंद्रपुर- 60 रुपये प्रति किलो
नांदेड़- 65 रुपये प्रति किलो
पालघर- 65 से 70 रुपये प्रति किलो
लातूर- 70 रुपये प्रति किलो
हिंगोली- 70 रुपये प्रति किलो
वाशिम 78 से 80 रुपये प्रति किलो
नागपुर 68 से 70 रुपये प्रति kg
बुलढाणा 78 से 80 रुपये प्रति किलो
गोंदिया 70 रुपये प्रति kg
भंडारा 68 रुपये प्रति kg
वर्धा 62 से 64 रुपये प्रति kg
अकोला 65 रुपये प्रति kg
चंद्रपुर 60 रुपये प्रति kg
अमरावती 75 रुपये प्रति kg
यवतमाल 75 से 78 रुपये प्रति kg
गढ़चिरौली 60 रुपये प्रति kg
मिठाइयों के दाम बढ़ेंगे
हिंगोली शहर में मिठाई की दुकानें सुबह से ही तरह-तरह की मिठाइयां बनाने में बिज़ी हैं। पेड़े, बर्फी, गुलाब जामुन, जलेबी, लड्डू जैसी कई मिठाइयों को बनाने में बहुत ज़्यादा चीनी का इस्तेमाल होता है। हालांकि, चीनी के दाम बढ़ने से मिठाई बेचने वालों का खर्चा बैलेंस अब बिगड़ गया है। पहले चीनी पर जितना खर्च होता था, अब उसी प्रोडक्ट के लिए उससे ज़्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। चीनी की कीमत बढ़ने का सीधा असर न सिर्फ मिठाई बेचने वालों पर, बल्कि कंज्यूमर्स की जेब पर भी पड़ने की संभावना है। क्योंकि बेचने वालों का कहना है कि अगर प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ती है, तो मिठाई की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है।
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