भारत को तेल खरीदने के लिए वेनेजुएला के दरवाज़े फिर खुले!

वेनेजुएला से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाने वाले ट्रंप ने एक नया ऑफर दिया है

भारत को तेल खरीदने के लिए वेनेजुएला के दरवाज़े फिर खुले!

The doors to Venezuela are open again for India to buy oil!

पिछले साल रूस से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाने वाले अमेरिका ने अब नई दिल्ली को बताया है कि वह जल्द ही रूसी तेल इंपोर्ट की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदना फिर से शुरू कर सकता है। इससे सप्लाई एक विकल्प के तौर पर जारी रह सकती है क्योंकि नई दिल्ली रूसी तेल इंपोर्ट कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बता दें की मादुरो के अपहरण से पहले अमेरिका रुसी तेल की तरह वेनजुएला के तेल बिक्री पर भी इसी तरह के टेर्रिफ लगाए थे।

ट्रंप का यह ऑफर वाशिंगटन द्वारा इंपोर्ट पर टैक्स बढ़ाने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद कम करने के बाद आया है। सूत्रों ने बताया है कि भारत अब आने वाले महीनों में रूसी तेल की अपनी खपत को कई लाख बैरल प्रति दिन कम करने की राह पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में भारत समेत वेनेज़ुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 परसेंट टैक्स लगाया था, और उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो के खिलाफ अपना कैंपेन तेज किया था। वहीं निकोलस मादुरो के आवास पर हमला कर उनका अपहरण करने के बाद वॉशिंगटन ने मन बदलने का संकेत दिया है और नई दिल्ली से कहा है कि वह रूस की घटती सप्लाई की भरपाई के लिए वेनेज़ुएला से खरीदना फिर से शुरू कर सकता है।

अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि वेनेज़ुएला का तेल विटोल या ट्रैफिगुरा जैसे बाहरी ट्रेडिंग हाउस के ज़रिए बेचा जाएगा या सीधे वेनेज़ुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA के ज़रिए। 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के बैन और कई तरह की छूट मिलने के बाद भारत रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार बना। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में भारतीय सामान पर टैरिफ बढ़ाकर अगस्त तक 50 परसेंट कर दिया, और रूसी तेल की खरीद पर 25 परसेंट टैक्स लगा दिया।

भारत जल्द ही अपने रूसी तेल इंपोर्ट को 1 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) से कम करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स के अनुसार जनवरी में भारत की रुसी तेल की आयात लगभग 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन रही और फरवरी में इसके घटकर लगभग 1 मिलियन बैरल प्रति दिन और मार्च में 800,000 बैरल प्रति दिन होने की उम्मीद है। इससे भारत को US के साथ एक बड़ी ट्रेड डील करने में मदद मिल सकती है।

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