भारत और अमेरिका के बीच साल की कड़ी बातचीत के बाद आखिरकार व्यापार समझौता हो गया है, जिसके तहत भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए गए हैं। इस फैसले से वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं और रसायन जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (2 फरवरी) को इस समझौते की घोषणा की, जिसे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
उच्च टैरिफ के बावजूद भारत के अमेरिका को निर्यात में हाल के महीनों में मजबूती देखी गई। अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का निर्यात 11.3 प्रतिशत बढ़कर 59 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें स्मार्टफोन शिपमेंट दोगुना होकर 16.7 अरब डॉलर हो गया। अब टैरिफ में कटौती के बाद कई श्रम-प्रधान और निर्यातोन्मुख क्षेत्रों में मांग और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
वस्त्र और परिधान उद्योग को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत के कपड़ा निर्यात को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे कम लागत वाले देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलती रही है। अब 18 प्रतिशत का नया अमेरिकी शुल्क बांग्लादेश और श्रीलंका पर लागू 20 प्रतिशत टैरिफ से कम है, जिससे भारत को मूल्य प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है। अमेरिका भारत के कुल वस्त्र निर्यात का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा है और वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने अमेरिका को 11 अरब डॉलर के कपड़ा और परिधान उत्पाद निर्यात किए।
विशेषज्ञों का मानना है की वित्त वर्ष 2027 से इस क्षेत्र में परिधान और होम टेक्सटाइल निर्यात में महीने-दर-महीने दो अंकों की वृद्धि देखी जा सकती है, जिससे मासिक परिधान निर्यात 1.27 अरब डॉलर से बढ़कर 1.5 से 1.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। समझौता भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा।
रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए भी यह सौदा अहम माना जा रहा है। अमेरिका इस उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है, जहां लगभग 30 प्रतिशत निर्यात जाता है। टैरिफ दबाव के चलते हाल के महीनों में निर्यात में तेज गिरावट आई थी। अब शुल्क में कटौती से कीमतों में स्थिरता और मांग में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
झींगे जैसे समुद्री खाद्य और फ्रोज़न खाद्य उत्पादों के निर्यातक अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर हैं। टैरिफ घटने से भारतीय झींगा अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए सस्ता होगा। इसी तरह, कालीन, विशेष रसायन, कृषि-रसायन, पैकेज्ड फूड, चावल और इंजीनियरिंग वस्तुओं में भी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञ कहते है की, जिन प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है उनमें वस्त्र और परिधान, ऑटो एंसिलरी और इंजीनियरिंग, विशेष रसायन, कृषि और समुद्री उत्पाद, तथा अमेरिका में मौजूदगी रखने वाले चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता निर्माता शामिल हैं।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों पर इस टैरिफ कटौती का असर नहीं पड़ेगा। अमेरिकी ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट, 1962 की धारा 232 के तहत आने वाले उत्पाद, जैसे ऑटोमोबाइल, स्टील, एल्युमिनियम, तांबा और जहाज अब भी ऊंचे शुल्क के दायरे में रहेंगे। इन क्षेत्रों पर स्पष्टता को लेकर उद्योग जगत आगे के विवरण का इंतजार कर रहा है।
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