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Tuesday, March 3, 2026
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से रुपया 1% मजबूत, निवेशकों का भरोसा बढ़ा!

विश्लेषकों ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपया पहले और ज्यादा मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में यह 90.20 से 91.20 के दायरे में स्थिर हो गया।

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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने के बाद मंगलवार को भारतीय रुपया 1 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हो गया। रुपया डॉलर के मुकाबले 90.29 के स्तर पर ट्रेड करता दिखा। इस समझौते से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और विदेशी निवेश भारत की ओर आने लगा।

सोमवार को रुपया 91.53 पर बंद हुआ था। उससे पहले के सत्र में रुपया 48 पैसे मजबूत होकर दो हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने स्पॉट मार्केट में दखल दिया था।

विश्लेषकों ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपया पहले और ज्यादा मजबूत हुआ था, लेकिन बाद में यह 90.20 से 91.20 के दायरे में स्थिर हो गया। 92 के ऊपर टिक न पाने के बाद इसमें थोड़ी गिरावट आई, जिसे सामान्य सुधार माना जा रहा है।

बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि रुपए की मौजूदा गिरावट अस्थायी है और लंबे समय में इसका रुझान अभी भी मजबूत बना हुआ है। अगर रुपया 90.50-90.80 के नीचे जाता है, तो यह 90 या 89.80 तक भी पहुंच सकता है।

डॉलर के मुकाबले रुपए के मजबूत होने से एमसीएक्स पर सोने-चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं दिख रही है। हालांकि, मध्यम अवधि में कीमती धातुओं का रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बताया कि भारत के साथ ट्रेड डील हुई है। इसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला टैक्स (टैरिफ) 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद लिया गया।

इस समझौते में यह भी कहा गया है कि भारत रूस से तेल की खरीद कम करेगा और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से ज्यादा तेल आयात करेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रेड डील के बाद अनिश्चितता कम हुई है, जिससे विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड में निवेश कर सकते हैं। इससे रुपए की मांग और बढ़ सकती है। हालांकि, आने वाले दिनों में आरबीआई का रुख भी काफी अहम रहेगा।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील, भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) एफटीए और विकास पर केंद्रित बजट, इन तीनों के असर से बाजार का माहौल बेहतर होने की उम्मीद है। इससे विदेशी पूंजी तेजी से आ सकती है और भारत के भुगतान संतुलन (बीओपी) की स्थिति भी सुधर सकती है।

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