गठिया कोई सामान्य दर्द नहीं है। यह एक पुरानी स्थिति है जिसमें जोड़ों में सूजन, लगातार अकड़न और बेचैनी होती है। इससे व्यक्ति की गतिशीलता सीमित हो जाती है और छोटे-छोटे काम भी थका देने वाले बन जाते हैं।
योग जोड़ों को अंदर से मजबूत बनाता है, लचीलेपन को बढ़ाता है, अकड़न को कम करता है और आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करके जोड़ों की रक्षा करता है। इससे न सिर्फ दर्द में राहत मिलती है बल्कि गतिशीलता भी बनी रहती है और रोजाना की थकान से बचाव होता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, “योग युक्त रहें, रोग मुक्त बने रहें।” नियमित योग अभ्यास न सिर्फ लक्षणों को नियंत्रित करता है बल्कि बीमारी की जड़ पर भी काम करता है। सुबह खाली पेट 30-45 मिनट का योग दिनचर्या में शामिल करने से सुधार देखा जा सकता है। जो लोग जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, उन्हें योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। योगाभ्यास शुरू करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
एक्सपर्ट के अनुसार गठिया के प्रबंधन में लाभकारी योगासन और प्राणायाम में गोमुखासन, भ्रामरी, पवनमुक्तासन, मर्जरीआसन, ताड़ासन और शीतली प्राणायाम हैं।
गोमुखासन कंधों, घुटनों और कूल्हों की अकड़न दूर करने में बेहद असरदार है। पवनमुक्तासन कमर और घुटनों के दर्द को कम कर पाचन सुधारता है। मर्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर जोड़ों की जकड़न को कम करता है।
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