हालांकि, भारत के घरेलू क्रिकेट में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी हैं, जो वर्षों से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पा रहे हैं। इन खिलाड़ियों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इन्हें कम से कम टेस्ट टीम में मौका और मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने के लिए टी20 फॉर्मेट से आने वाले खिलाड़ियों के ऊपर तरजीह जरूर मिलनी चाहिए।
अभिमन्यु ईश्वरन: फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में खेले 114 मुकाबलों में 47 की औसत से 8,396 रन बना चुके अभिमन्यु ईश्वरन भारतीय ड्रेसिंग रूम तक तो पहुंच चुके हैं, लेकिन पिछले तीन साल से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अनुभव और दमदार रिकॉर्ड होने के बावजूद अभिमन्यु ड्रेसिंग रूम में बैठकर मैदान पर भारत की जर्सी पहनकर उतरने का सपना ही देखते रहे हैं।
धर्मेंद्रसिंह जडेजा: 100 फर्स्ट-क्लास मैचों में 423 विकेट। लिस्ट-ए क्रिकेट में 121 विकेट और टी20 में 65 विकेट। यह धर्मेंद्रसिंह जडेजा के बेमिसाल आंकड़े हैं, जिन्होंने साल 2013 में फर्स्ट-क्लास डेब्यू किया था। हालांकि, वह पिछले 13 वर्षों से भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने की आस लगाए बैठे हैं।
शाहबाज अहमद: भारत के लिए 3 वनडे और दो टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके शाहबाज अहमद लंबे समय से टेस्ट टीम में मौका मिलने की राह देख रहे हैं। शाहबाज बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी अहम योगदान दे सकते हैं।
सरफराज खान: सरफराज खान भारतीय टीम के लिए टेस्ट डेब्यू कर चुके हैं। हालांकि, 2024 में डेब्यू करने के बाद पिछले दो वर्षों में उन्हें सिर्फ 6 टेस्ट मैच ही खेलने का मौका मिला है।
शम्स मुलानी: घरेलू क्रिकेट में शम्स मुलानी को मुंबई का स्टार ऑलराउंडर माना जाता है। बल्ले और गेंद दोनों से ही वह किसी भी मैच का रुख पलटने का दमखम रखते हैं। 59 फर्स्ट-क्लास मैचों में मुलानी ने 269 विकेट चटकाए हैं, जबकि बल्लेबाजी में वह 2,577 रन बना चुके हैं।



