आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उत्तानपादासन पेट की मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर को मजबूत बनाने में मदद करता है। जब हम इस आसन को करते हैं तो पेट के निचले हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे वहां रक्त संचार बेहतर होता है।
इस आसन का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है। जब इसे करते समय हम धीरे-धीरे और गहरी सांस लेते हैं, तो दिमाग को शांति मिलती है और तनाव कम होता है। यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने में मदद करता है, जिससे चिंता और बेचैनी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। पढ़ाई या ऑफिस के दबाव में रहने वाले लोगों के लिए यह आसन मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
उत्तानपादासन करने की विधि भी बहुत आसान है। सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और दोनों हाथ शरीर के पास रखें। हथेलियां नीचे की ओर होनी चाहिए। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ लगभग 30 से 45 डिग्री तक ऊपर उठाएं। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक रुकें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को वापस जमीन पर ले आएं। इसे अपनी क्षमता के अनुसार कुछ बार दोहराया जा सकता है।
हालांकि, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, पीठ दर्द या रीढ़ से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है, उन्हें यह आसन सावधानी के साथ करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और हाल ही में पेट की सर्जरी कराने वाले लोगों को यह आसन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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