हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को संभालने में बहुत खराब काम कर रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में अहम शांति वार्ता होने वाली है।
ट्रंप ने 9 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “ईरान बहुत खराब काम कर रहा है, कुछ लोग कहेंगे कि यह बेईमानी है, कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल जाने दिया। हमारा यह समझौता नहीं है!” उन्होंने एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया, “ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से जाने वाले टैंकर्स से फीस ले रहा है – बेहतर होगा कि वे ऐसा न करें और अगर वे ऐसा कर रहे हैं, तो उन्हें अभी ऐसा करना बंद कर देना चाहिए!”
ज्ञात हो की हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है और इस समय विवाद का केंद्र बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन की प्रमुख शर्तों में से एक यह थी कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के हो।
हालांकि, ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया है और अब जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना बना रहा है। यह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई, क्योंकि यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय होने के कारण यह किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं आता। ईरान ने हालांकि संकेत दिया है कि वह जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करेगा, लेकिन यह उसके सैन्य समन्वय और टोल भुगतान के साथ ही संभव होगा।
दौरान अमेरिका और ईरान के शीर्ष अको धिकारी इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को अहम बातचीत के लिए जुटने वाले हैं। यह वार्ता पिछले पांच हफ्तों से जारी युद्ध खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस वार्ता में हिस्सा लेंगे। वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि औपचारिक बातचीत 10 अप्रैल को शुरू होगी या 11 अप्रैल से। पाकिस्तान ने इस दौरान इस्लामाबाद में दो दिन की स्थानीय छुट्टी भी घोषित की है।
दौरान इज़राइल द्वारा लेबनान में किए जा रहे बड़े हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इन हमलों में पिछले दो दिनों में 300 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जिससे अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका और इज़राइल का कहना है कि लेबनान इस युद्धविराम का हिस्सा नहीं था, जबकि ईरान का दावा है कि यह समझौते में शामिल था और हमले जारी रहे तो युद्धविराम टूट सकता है।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि लेबनान में युद्धविराम नहीं होगा ,जबकि ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि इज़राइल हमले कम कर रहा है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है, क्योंकि यह दुनिया के तेल और LNG आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। ऐसे में इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर है, जहां यह तय होगा कि युद्ध खत्म होगा या पश्चिम एशिया में संकट और गहराएगा।
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