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ट्रम्प द्वारा लगाया गया 10% वैश्विक शुल्क ‘अवैध’

अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का फैसला

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनके द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क को अवैध करार दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय की तीन न्यायाधीशों वाली खंडपीठ ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने कानून के तहत कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति को दिए गए शुल्क लगाने के अधिकार का उल्लंघन किया है। बहुमत वाले फैसले में इन शुल्कों को अवैध और कानूनी रूप से अनधिकृत बताया गया। हालांकि, पीठ के तीसरे न्यायाधीश ने असहमति जताते हुए कहा कि कानून राष्ट्रपति को शुल्क लगाने के मामले में व्यापक अधिकार देता है।

अमेरिकी व्यापार अदालत ने गुरुवार(7 मई) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए नए 10 प्रतिशत आधारभूत शुल्क के खिलाफ फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून के तहत इस प्रकार का व्यापक शुल्क उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस दौरान अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा 24 फरवरी को लागू किए गए शुल्कों को चुनौती देने वाले छोटे कारोबारियों के पक्ष में निर्णय दिया। अंतिम फैसला 2-1 से आया, जिसमें एक न्यायाधीश ने कहा कि छोटे व्यापारिक याचिकाकर्ताओं को राहत देना जल्दबाजी होगी।

सुनवाई के दौरान छोटे व्यवसायों ने दलील दी कि ये नए शुल्क ट्रम्प प्रशासन द्वारा अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक फैसले को दरकिनार करने की कोशिश हैं, जिसने 2025 में अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां कानून के तहत लगाए गए शुल्कों को रद्द कर दिया था। इस वर्ष फरवरी के आदेश में ट्रम्प ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का उपयोग किया था, जिसके तहत गंभीर भुगतान संतुलन घाटे को सुधारने या डॉलर के संभावित अवमूल्यन को रोकने के लिए सरकार को 150 दिनों तक शुल्क लगाने की अनुमति दी गई थी।

ट्रम्प प्रशासन गुरुवार के इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है। यह अपील पहले वॉशिंग्टन स्थित अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट में जाएगी और बाद में मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। कानूनी लड़ाई जारी रहने के बीच प्रशासन वैकल्पिक शुल्क उपायों की भी तलाश कर रहा है। चीन, यूरोपीय यूनियन और जापान सहित 16 व्यापारिक साझेदार देशों की जांच की जा रही है कि क्या वे अत्यधिक उत्पादन के जरिए कीमतें घटाकर अमेरिकी निर्माताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा नाइजीरिया से लेकर नॉर्वे तक और अमेरिका के 99 प्रतिशत आयात के लिए जिम्मेदार 60 अर्थव्यवस्थाओं की भी जांच हो रही है कि क्या वे जबरन मजदूरी से बने सामान के व्यापार को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही हैं।

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