इज़रायल, अमेरिका और ईरान दरम्यान युद्ध का असर खाड़ी देशों पर भी देखने को मिल रहा है। युद्ध के कारण सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी सामग्री वाले वीडियो क्लिप पोस्ट करने के आरोप में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अधिकारियों ने 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन 35 गिरफ्तार लोगों में 19 भारतीय भी शामिल हैं।
अधिकारियों ने इससे पहले भी निवासियों को कई बार चेतावनी दी थी कि वे हमले के स्थानों का वीडियो न बनाएं, कोई फुटेज साझा न करें और बिना सत्यापन के कोई भी जानकारी ऑनलाइन प्रसारित न करें। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की गई है।
15 मार्च को यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमाद सैफ अल शम्सी ने विभिन्न देशों के नागरिकों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए और उनके खिलाफ तेजी से मुकदमा चलाने के निर्देश भी जारी किए। अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार किए गए लोगों में 19 भारतीय भी शामिल हैं। शम्सी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने और देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से फर्जी जानकारी और कृत्रिम सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
शम्सी ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां कानून के तहत अपराध हैं और इसके लिए कम से कम एक वर्ष की जेल और न्यूनतम 1,00,000 दिरहम का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “ऐसी घटनाओं का दुरुपयोग गलत जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जनता को जानबूझकर गुमराह करना और राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यवस्था तथा स्थिरता को नुकसान पहुंचाना है।” उन्होंने बताया कि सरकारी वकीलों ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने के आदेश दिए गए हैं।
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