अमेरिका, इज़राइल बनाम ईरान के बीच हालिया युद्धविराम के कुछ सप्ताह बाद अब शांति वार्ता गहरे संकट में फंसती दिखाई दे रही है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स न्यूज़ द्वारा जारी एक कथित लीक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ईरान के सामने पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इसके जवाब में तेहरान ने भी अपनी पांच पूर्व शर्तें सामने रख दी हैं, जिससे साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं फिलहाल बेहद कमजोर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान स्थायी शांति समझौते से पहले अपने परमाणु और सैन्य ढांचे में बड़े बदलाव स्वीकार करे। अमेरिकी प्रस्ताव की पहली शर्त में कहा गया है कि ईरान अपने 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को सीधे अमेरिका को सौंपे। दूसरी शर्त के तहत ईरान को अपनी अधिकांश परमाणु संरचना स्थायी रूप से खत्म करनी होगी और केवल एक परमाणु केंद्र को चालू रखने की अनुमति होगी।
अमेरिका ने तीसरी शर्त में साफ कहा है कि युद्ध के दौरान हुए भारी इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान के लिए ईरान को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। चौथी शर्त के अनुसार, ईरान की विदेशों में जमी अरबों डॉलर की संपत्तियों में से 25 प्रतिशत भी जारी नहीं किया जाएगा। पांचवीं शर्त में क्षेत्रीय संघर्षविराम को वार्ता की प्रगति से जोड़ते हुए कहा गया है कि स्थायी शांति केवल चरणबद्ध समझौतों के आधार पर ही संभव होगी।
इसके जवाब में ईरान ने भी अपनी पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। तेहरान ने सबसे पहले सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकने की मांग की है, जिसमें लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान को भी शामिल किया गया है। दूसरी मांग में ईरान ने 13 अप्रैल से लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल हटाने को कहा है।
ईरान ने तीसरी शर्त में अमेरिका और इज़राइल से युद्ध में हुए बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए पूर्ण आर्थिक मुआवजा मांगा है। चौथी मांग में सभी अमेरिकी बैंकिंग और व्यापारिक प्रतिबंधों को हटाने तथा विदेशों में जमी ईरानी संपत्तियों को पूरी तरह मुक्त करने की बात कही गई है। वहीं पांचवीं मांग में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर अपनी पूर्ण अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता की मान्यता मांगी है, ताकि वह समुद्री यातायात को नियंत्रित कर सके।
इस बीच युद्धविराम लगातार कमजोर पड़ता दिख रहा है। सप्ताहांत में संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहरी जनरेटर पर ड्रोन हमला हुआ, जबकि इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में 100 से अधिक हवाई हमले किए। इन हमलों में फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद और हिजबुल्लाह के कमांडरों को निशाना बनाया गया।
तनाव बढ़ने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को खुली चेतावनी दी। ट्रंप ने लिखा, ‘द क्लॉक इस टीकिंग’, उन्होंने कहा, “उन्हें जल्दी से चलना चाहिए, वरना उनमें से कुछ भी नहीं बचेगा। समय बहुत कीमती है।”
फ्रांसीसी मीडिया द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान इतनी कठोर अमेरिकी शर्तों को मानेगा, ट्रंप ने जवाब दिया, “मुझे कोई आइडिया नहीं है. लेकिन उन्हें एक डील करनी चाहिए.”
ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव को राष्ट्रीय संप्रभुता का अपमान बताया जा रहा है। अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि इन शर्तों के तहत बातचीत शुरू करना सीधे कूटनीतिक गतिरोध की ओर ले जाएगा। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के हवाले से कहा,“अगर ईरान ये शर्तें मान भी लेता है, तो भी यूनाइटेड स्टेट्स और ज़ायोनीस्ट शासन (इज़राइल) से हमले का खतरा बना रहेगा।”
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी ट्रंप प्रशासन पर लापरवाह युद्ध-उत्तेजक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वाशिंगटन पहले कूटनीतिक प्रक्रियाओं को नष्ट करता है और फिर पूर्ण आत्मसमर्पण जैसी शर्तें थोपने की कोशिश करता है।
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