अमेरिका ने भारत, चीन समेत दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आयात पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम उन देशों के खिलाफ प्रस्तावित किया गया है जिन पर अमेरिका ने जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने या उस पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी समीक्षा के चरण में है और इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। साथ ही इसे प्रतिक्रियात्मक टैरिफ या दबाव के तौर पर दिखाया जा रहा है।
यह प्रस्ताव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) द्वारा पेश किया गया है। इसे अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 (सेक्शन 301) के तहत लाया गया है। यही कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान चीन से आयातित वस्तुओं पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
धारा 301 अमेरिका को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देती है जिनकी व्यापारिक नीतियों को वह अमेरिकी व्यापार हितों के लिए हानिकारक या अनुचित मानता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो वैश्विक व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
ज्ञात हो की, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता जारी है। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच 2 जून से शुरू हुई बातचीत 4 जून तक चलने वाली है। इसी बीच यूएसटीआर ने भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लागू किया है, उन्हें 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। वहीं जिन देशों ने ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं किया है, उनके लिए 12.5 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया है।
यूएसटीआर की जांच में भारत और चीन उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल पाए गए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर न तो जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रभावी कानूनी प्रतिबंध लगाए और न ही मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया।
भारत के संबंध में यूएसटीआर ने कहा कि देश “जबरन श्रम से जुड़े आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहा है।” रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि भारत की नीतियां और प्रथाएं अमेरिकी व्यापार को प्रभावित करती हैं।
अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि जबरन श्रम के माध्यम से तैयार वस्तुएं कम लागत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रवेश कर जाती हैं, जिससे उन देशों के व्यवसायों और श्रमिकों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होती है जो सख्त श्रम मानकों का पालन करते हैं।
भारत और चीन के अलावा यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, कनाडा, मैक्सिको और कई खाड़ी देश भी इस सूची में शामिल हैं। यूएसटीआर के अनुसार कनाडा, मैक्सिको, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, इक्वाडोर और यूरोपीय संघ जैसे छह क्षेत्रों में कानूनी प्रतिबंध तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया।
यूएसटीआर ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे लागू करने से पहले व्यापक समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह प्रक्रिया स्पष्ट करती है की सेक्शन 301 का इस्तेमाल भारत पर व्यापार समझौते की बातचीत में दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दर्शाता है कि श्रम मानक, आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता और जबरन श्रम से जुड़े मुद्दे अब अमेरिकी व्यापार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होते हैं तो भारत और चीन सहित एशिया के कई निर्यातक देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
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