यह पहली बार नहीं है कि अत्याधुनिक फाइटर जेट एफ-16 क्रैश हुआ हो। इससे पहले भी अलग-अलग वजहों से इसे बनाने वाले अमेरिका के अलावा स्पेन, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, नीदरलैंड, बेल्जियम, मोरक्को, यमन, जॉर्डन, सीरिया समेत कई देशों में फाइटर जेट एफ-16 के हादसे हो चुके हैं। इन घटनाओं में कई पायलट मारे गए।
1970 के दशक अमेरिकी वायुसेना ने लाइटवेट फाइटर प्रोग्राम के तहत इसका निर्माण शुरू किया था। हल्के और सस्ते होने के अलावा एफ-16 फाइटर की फेरी रेंज और स्पीड बाकी लड़ाकू विमानों से कहीं ज्यादा होती है। फिर ऐसे क्या कारण हैं कि पिछले पांच दशक में अत्याधुनिक और भरोसेमंद माने जाने वाले एफ-16 विमान क्रैश की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
अमेरिकी कंपनी जनरल डायनामिक्स ने सबसे पहले 1974 में एफ-16 लड़ाकू विमान बनाया था। 1990 के दशक में मर्जर के बाद इस कंपनी का नाम बदलकर लॉकहीड मार्टिन हो गया। 4.5++ जेनरेशन का एफ-16 सबसे उन्नत तकनीक का माना जाता है।
फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट के बने रफाल की हथियार ले जाने की क्षमता करीब 9500 किलोग्राम है। रफाल विमान की फेरी रेंज 3,700 किमी है, जो कि एफ-16 से काफी कम है। एफ-16 फाइटर जेट के रखरखाव पर प्रतिघंटे करीब 25000 डॉलर, जबकि रफाल के रखरखाव पर 30 से 35 हजार डॉलर खर्च होते हैं। अगर स्पीड की बात करें तो रफाल की स्पीड करीब 2200 किलोमीटर प्रति घंटे है।
पोलैंड में एफ-16 फाइटर जेट के क्रैश के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू हो गई है हादसे में मारे गए पायलट मैसी क्राकोवियन काफी अनुभवी पायलट थे। अब उन वजहों पर भी गौर फरमा लेते हैं कि रफाल से कई मामलों में उन्नत एफ-16 फाइटर जेट के अलग-अलग देशों में क्रैश की वजह क्या है।
कुछ पुराने एफ‑16 मॉडल के एफ-16 फाइटर जेट इंजन में खराबी के चलते क्रैश हुए। इसके अलावा हाइड्रोलिक सिस्टम की विफलता, नेविगेशन सिस्टम फेलियर, ऑटोमैटिक फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में गड़बड़ी और ईंधन प्रणाली में खराबी भी क्रैश की वजह बनी।
कुछ मिशनों में पायलट ने कम ऊंचाई पर फाइटर जेट को मोड़ा, जिससे विमान जमीन से टकरा गया। युद्ध क्षेत्र में दुश्मन के मिसाइल या एंटी-एयरक्राफ्ट गन के हमले से भी एफ-16 फाइटर जेट गिर चुके हैं।
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