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गर्मी में क्यों तेजी से बढ़ता है पित्त दोष? जानें कारण से लेकर आयुर्वेदिक उपाय

यह सिर्फ गर्मी के कारण ही नहीं बल्कि शरीर में पित्त बढ़ने के कारण भी होता है। हमारा शरीर पित्त बढ़ने पर कई तरह के संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।

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गर्मियों की शुरुआत के साथ ही शरीर में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिल जाते हैं। अत्यधिक गर्मी लगती है और पसीने आने की वजह से शरीर पर रैश निकलने शुरू हो जाते हैं। यह सिर्फ गर्मी के कारण ही नहीं बल्कि शरीर में पित्त बढ़ने के कारण भी होता है। हमारा शरीर पित्त बढ़ने पर कई तरह के संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है।

आयुर्वेद के मुताबिक, पित्त शरीर का संतुलित होना शरीर के लिए बहुत जरूरी है। पित्त दोष बढ़ने पर शरीर पहले छोटे संकेत देता है। बार-बार एसिडिटी होना एक सामान्य संकेत है; इसके साथ मुंह के छाले व जीभ लाल होना भी हथेली और तलवों में जलन महसूस होना, गर्मी सहन न होना, चेहरे पर रेडनेस व पसीना तेजी से आना,और गुस्सा जल्दी आना पित्त बढ़ने के संकेत हैं।

गर्मी में पित्त शरीर को अधिक प्रभावित करता है क्योंकि बाहर का वातावरण पहले ही गर्म होता है, जो शरीर के ताप के असंतुलन का कारण बनता है।

अब सवाल है कि क्या करें। पित्त को संतुलित करने के लिए शरीर के तापमान को स्थिर बनाए रखना जरूरी है। गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखें। तरल और ठंडी चीजों का सेवन करें और खूब सारा पानी पिएं। कोशिश करें कि रोजाना एक नारियल पानी का सेवन जरूर करें।

पित्त को संतुलित करने के लिए सौंफ का पानी सबसे प्रभावी तरीका है। रात को पानी में सौंफ को भिगों दें और सुबह हल्का गुनगुना कर पीयें। इससे पेट की पाचन अग्नि स्थिर रहेगी और जलन कम होगी। यह पेट में बनने वाले अधिक एसिड को भी शांत करेगी।

कोशिश करें कि गर्मियों में सीधी धूप में ज्यादा समय तक न रखें। इससे शरीर का तापमान बढता है और इससे पित्त भी प्रभावित होता है।

गर्मी में तुंरत ठंडे पदार्थों का सेवन न करें। इससे शरीर का ताप बुरी तरीके से असंतुलित होता है और सर्द-गर्म की समस्या बन सकती है। पित्त बढ़ना कोई बीमारी नहीं है; इसे आसानी से संतुलित किया जा सकता है। वहीं, अगर इसे संतुलित नहीं किया जाए तो शरीर में कई बीमारियां जन्म ले लेती हैं।

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