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ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करेगा अमेरिका? जानें ट्रंप ने क्या कहा

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ईरान के खिलाफ जारी अमेरिका–इज़राइल युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे ईरान के तेल पर कब्जा करने को प्राथमिकता देंने की बात की है। साथ ही संकेत दिए है की वॉशिंगटन ईरान के प्रमुख निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा कर सकता है। रविवार(29 मार्च) को एक इंटरव्यू में अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, “ईरान का तेल अपने कब्जे में लेना मेरी सबसे पसंदीदा बात है, लेकिन अमेरिका में कुछ लोग कहते हैं ‘आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?’ लेकिन वे लोग मूर्ख हैं।”

अमेरिका–ईरान संघर्ष में खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की संभावना जताई जा रही है, जहां से ईरान के अधिकांश तेल निर्यात होते हैं। इस कदम से संघर्ष और तेज हो सकता है तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। मध्य पूर्व में बढ़ते संकट के चलते सोमवार को एशियाई बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, और पिछले एक महीने में इसमें 50% से अधिक की वृद्धि बनी हुई है।

ट्रम्प ने कहा कि पेंटागन कई सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, “संभव है कि हम खार्ग द्वीप पर कब्जा करें, संभव है कि न करें। हमारे पास कई विकल्प हैं।इसका मतलब यह भी होगा कि हमें कुछ समय तक खार्ग द्वीप पर रहना पड़ सकता है।” जब उनसे द्वीप पर ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूछा गया, तो ट्रम्प ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई मजबूत सुरक्षा है। हम इसे बहुत आसानी से अपने कब्जे में ले सकते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने क्षेत्र पर कब्जा करने और उसे बनाए रखने के लिए प्रशिक्षित 10,000 सैनिकों की तैनाती के आदेश पहले ही दे दिए हैं। करीब 2,200 मरीन सैनिकों सहित लगभग 3,500 जवान शुक्रवार को इस क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जबकि 2,200 मरीन सैनिक और रास्ते में हैं। वॉशिंगटन संभावित विस्तारित अभियान की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों अतिरिक्त सैनिकों को भी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच, ईरान–इज़राइल और अमेरिका के बीच का संघर्ष अब दोनों देशों से आगे फैलता नजर आ रहा है। शुक्रवार को सऊदी अरब में एक अमेरिकी एयरबेस पर हुए हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए और 270 मिलियन डॉलर मूल्य के ई-3 सेंट्री निगरानी विमान को नुकसान पहुंचा। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इज़राइल की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष के और फैलने तथा वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।

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