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Sunday, June 21, 2026
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गर्भावस्था में मां और शिशु के लिए बेहद फायदेमंद है यह फल

कब्ज, कमजोरी और तनाव से देता है राहत

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गर्भावस्था महिला के जीवन की एक बहुत संवेदनशील और आनंदमय स्टेज होती है। इस दौरान मां का शरीर केवल अपनी ही नहीं, बल्कि गर्भ में विकसित हो रहे शिशु की जरूरतों को भी पूरा करता है। ऐसे में आहार को लेकर कई सवाल स्वाभाविक रूप से मन में आते हैं- क्या खाना चाहिए, कितना खाना चाहिए और ऐसा कौन-सा भोजन लिया जाए जो मां को ऊर्जा दे तथा शिशु के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सही विकास में सहायक हो।

इन्हीं पोषक आहार विकल्पों में एक महत्वपूर्ण फल है शरीफा, जिसे कस्टर्ड एप्पल या सीताफल के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में शरीफा को बल्य यानी शक्ति देने वाला फल माना गया है। वहीं विज्ञान भी मानता है कि शरीफा पोषण का भंडार है। इसका स्वाद मीठा होता है। यह शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए धीरे-धीरे ताकत देता है। गर्भावस्था में जब महिला का शरीर जल्दी थक जाता है और पाचन कमजोर हो जाता है, तब शरीफा बहुत लाभदायक होता है।

सीताफल में प्राकृतिक शर्करा होती है, जो शरीर में जाते ही धीरे-धीरे ऊर्जा में बदल जाती है। गर्भावस्था में महिला को बार-बार कमजोरी महसूस होती है और चक्कर आते हैं। सीताफल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, जिससे मां खुद को थोड़ा हल्का और मजबूत महसूस करती है। यही ऊर्जा रक्त के जरिए गर्भ में पल रहे बच्चे तक भी पहुंचती है।

आयुर्वेद के अनुसार सीताफल वात को शांत करता है। गर्भावस्था में वात बढ़ने से पेट दर्द, गैस, बेचैनी और नींद की कमी जैसी समस्याएं होती हैं। सीताफल का गूदा पेट में जाकर ठंडक देता है, आंतों को मुलायम बनाता है और पाचन को सहज करता है।

विज्ञान भी कहता है कि सीताफल में भरपूर फाइबर होता है, जो कब्ज को दूर करता है। गर्भावस्था में कब्ज एक आम समस्या है, और शरीफा इसे बिना दवा के ठीक करने में मदद करता है।

सीताफल में विटामिन बी6 पाया जाता है, जो गर्भावस्था के लिए बहुत जरूरी होता है। यह विटामिन बच्चे के दिमाग के विकास में मदद करता है। साथ ही, यह मां के मूड को भी संतुलित करता है। गर्भावस्था में हार्मोन बदलते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ता है। सीताफल इन भावनात्मक उतार-चढ़ाव को शांत करने में मदद करता है।

विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट सीताफल को और खास बनाते हैं। ये तत्व मां की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इसका मतलब है कि मां का शरीर संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाता है और बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। जब मां स्वस्थ रहती है, तो बच्चा भी सुरक्षित रहता है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर की अंदरूनी सफाई करते हैं, जिससे खून साफ रहता है और बच्चे तक साफ पोषण पहुंचता है।

सीताफल में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे तत्व भी होते हैं। आयरन खून बनाने में मदद करता है, जिससे एनीमिया का खतरा कम होता है। कैल्शियम बच्चे की हड्डियों और दांतों की नींव मजबूत करता है। मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देता है और पोटैशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक होता है। ये सभी तत्व मिलकर मां के शरीर को संतुलन में रखते हैं और बच्चे के विकास को सही दिशा देते हैं।

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